मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार को इनकम टैक्स का 10.61 करोड़ का नोटिस

16 अप्रैल 2025 | The Newswala बूंदी: राजस्थान के बूंदी जिले के झालीजी का बराना गांव में मिट्टी के बर्तन बनाकर गुजर-बसर करने वाले कुम्हार विष्णु प्रजापत के लिए इनकम टैक्स विभाग का नोटिस किसी सदमे से कम नहीं है। आयकर विभाग ने विष्णु को 10 करोड़ 61 लाख 83 हजार रुपये का नोटिस भेजा है, जिसमें उन पर फर्जी कंपनी बनाकर डायमंड और गोल्ड के कारोबार में 13 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया गया है। इस नोटिस ने विष्णु और उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है।

आयकर विभाग के अनुसार, 19 मार्च 2020 को मुंबई के मिरगांव में ‘भूमिका ट्रेडिंग’ नाम से एक कंपनी रजिस्टर की गई थी। इस कंपनी का जीएसटी रजिस्ट्रेशन विष्णु के आधार कार्ड और पैन कार्ड के आधार पर किया गया। विभाग का दावा है कि इस फर्म ने वित्त वर्ष 2020-21 में सुरेंद्र सिंह बार्बल के नाम से 10.61 करोड़ रुपये और मेहित क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ 2.83 करोड़ रुपये का लेन-देन किया। इस लेन-देन पर टैक्स न जमा करने के चलते विष्णु को नोटिस जारी किया गया। विष्णु प्रजापत ने इस नोटिस को साइबर फ्रॉड का मामला बताते हुए कहा, “मैं एक गरीब कुम्हार हूं, जो मिट्टी के बर्तन बनाकर मुश्किल से परिवार चलाता हूं। मैंने कोई कंपनी नहीं बनाई और न ही इतने बड़े लेन-देन किए। मेरे आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग किया गया है।” विष्णु ने 11 मार्च को मिले नोटिस के बाद साइबर पुलिस और बूंदी के जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी है, जिसमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। बूंदी पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। डीएसपी अनिल जोशी ने बताया कि यह साइबर क्राइम का मामला नहीं लगता, लेकिन विष्णु के दस्तावेजों का दुरुपयोग कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। मामले को दही खेड़ा थाने को सौंपा गया है। पुलिस का मानना है कि विष्णु के दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्जी कंपनी रजिस्टर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया हो सकता है।

यह भी देखें  संजाव के युवक की मईल थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या

यह पहला मामला नहीं है, जब छोटे कारोबारियों या गरीब लोगों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर बड़े लेन-देन दिखाए गए हों। हाल ही में अलीगढ़ में 15 हजार रुपये मासिक कमाने वाले व्यक्ति को 33.88 करोड़, जूस बेचने वाले को 7.79 करोड़, और हरदोई में एक निजी कर्मचारी को 26 करोड़ रुपये का नोटिस मिला था। इन मामलों में भी साइबर अपराधियों ने आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाई थीं।

About Author

Leave a Reply

error: Content is protected !!