मन की शांति – पलक सिंह
मन की शांति न मिले बाज़ारों में, न सोने, चांदी, उपहारों में। यह तो बस…
मन की शांति न मिले बाज़ारों में, न सोने, चांदी, उपहारों में। यह तो बस…
बचपन भी एक जमाना था…. वो बचपन भी एक जमाना था, ना प्यार, ना कोई…
एक पिता सब कुछ लुटा देता है अपने बेटे पर अपनी जवानी, कमाई और सपने…
जी हां,मैंने देखा है ! किसी को एक मछली की तरह, तड़फड़ाते हुए मरना, देखा…
माँ है मेरी जग से निराली माँ है मेरी जग से निराली लट है उसकी…
कहते हैं प्रेम आत्मीयता की वह अनुभूति है जिस से कोई भी प्राणी अछूता नहीं…
मामा को मामी मिली, लगी मुकुल कलिका खिली , मस्तानी-सी कहीं अकेली , मगर थोड़ी…
आईए आज बात करते हैं साहित्य क्षेत्र में चोरियों की। साहित्य क्षेत्र में चोरियां आज…
हर डूबता सुरज एक पैग़ाम देता हैं मैं डूब रहा हु तो कल फिर उगने…
सुंदर मुख की अद्भुत ज्योति, जिमि चन्द्र की उपमा होती। नयन कमल सम कोमल कोमल…