वक्फ कानून में 14 बड़े बदलाव: पारदर्शिता या विवाद का नया दौर

नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2025: केंद्र सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश करने जा रही है, जिसमें वक्फ अधिनियम 1995 में 14 बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। इन बदलावों में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना, संपत्तियों का केंद्रीकृत पंजीकरण और जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम बता रही है, लेकिन मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा तबका इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानकर विरोध कर रहा है। आइए जानते हैं, क्या हैं ये बदलाव और क्यों है नाराजगी।

वक्फ कानून में 14 बड़े बदलाव

  1. गैर-मुस्लिमों की एंट्री: केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
  2. महिलाओं को प्रतिनिधित्व: हर बोर्ड में दो महिलाओं की नियुक्ति जरूरी होगी, ताकि लैंगिक समानता बढ़े।
  3. संपत्ति का केंद्रीकृत पंजीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन केंद्रीय पोर्टल पर होगा।
  4. जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी: संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहले जिला मजिस्ट्रेट की जांच और मंजूरी जरूरी होगी।
  5. वक्फ-अल-औलाद में बदलाव: यह प्रावधान महिलाओं के विरासत अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।
  6. पांच साल का इस्लाम पालन: संपत्ति दान करने वाला व्यक्ति कम से कम पांच साल से मुस्लिम धर्म का पालन कर रहा हो।
  7. धारा 40 में संशोधन: वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित करने की असीम शक्ति पर लगाम लगेगी।
  8. उच्च न्यायालय में अपील: वक्फ बोर्ड के फैसलों को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।
  9. संपत्ति का मूल्यांकन: जिला कलेक्टर वक्फ संपत्तियों का वैल्यूएशन करेंगे।
  10. बोहरा और आगाखानियों के लिए अलग बोर्ड: इन समुदायों के लिए अलग औकाफ बोर्ड का प्रस्ताव।
  11. ऐतिहासिक स्थलों पर असर नहीं: पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों की स्थिति में बदलाव नहीं होगा।
  12. सदस्यों की नियुक्ति: राज्य सरकार बोर्ड के सभी सदस्यों को नामित करेगी।
  13. कंप्यूटरीकरण: वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड डिजिटल होंगे।
  14. मुख्य कार्यकारी अधिकारी: वरिष्ठ अधिकारी को बोर्ड का सीईओ नियुक्त किया जाएगा।
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मुस्लिम समुदाय क्यों है नाराज?
मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बिल धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इसे “वक्फ संपत्तियों को हड़पने की साजिश” करार दिया है। प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार हैं:

  • धार्मिक स्वायत्तता पर हमला: गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति को वक्फ की धार्मिक प्रकृति के खिलाफ माना जा रहा है।
  • संपत्ति पर नियंत्रण: जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका से सरकारी दखल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
  • वक्फ की पहचान खतरे में: मुस्लिमों का मानना है कि यह बिल वक्फ की मूल भावना को कमजोर करेगा, जो इस्लाम में दान और कल्याण के लिए है।
  • राजनीतिक साजिश का आरोप: AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “यह असंवैधानिक बिल मुस्लिमों को उनके अधिकारों से वंचित करेगा।”

केंद्र सरकार और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि यह बिल भ्रष्टाचार खत्म करने और वक्फ संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए है। रिजिजू ने कहा, “यह मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े वर्गों को सशक्त करेगा। कोई धार्मिक हस्तक्षेप नहीं है, सिर्फ पारदर्शिता लाने की कोशिश है।”

एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत है, इसलिए बिल के पास होने की संभावना प्रबल है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे राज्यसभा में रोकने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने इसे “दंगे-फसाद कराने वाला बिल” बताया है। चर्चा के दौरान हंगामे के आसार हैं।

वक्फ बिल अब सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है। क्या यह पारदर्शिता लाएगा या विवाद को और गहरा करेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।

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