यूपी में कुर्मी-लोधी-जाट विधायकों पर भारी नाराजगी
लखनऊ, 25 मार्च 2025: उत्तर प्रदेश की सियासत में जातिगत समीकरण एक बार फिर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर के ताजा सर्वे ने चौंकाने वाले नतीजे सामने लाए हैं, जिसमें कुर्मी, लोधी और जाट समुदायों के विधायकों के खिलाफ जनता में सबसे ज्यादा गुस्सा देखा गया है। सर्वे के मुताबिक, इन तीनों ओबीसी जातियों के 75 विधायकों में से 95% को 2027 के चुनाव में दोबारा टिकट देने के खिलाफ जनता ने राय दी है। इसके अलावा, 84% मुस्लिम विधायकों को भी दोबारा मौका न देने की बात सामने आई है, जिसने राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
सर्वे में विधायकों को चार श्रेणियों—सामान्य, ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम—में बांटकर विश्लेषण किया गया। नतीजों से पता चला कि कुर्मी, लोधी और जाट विधायकों के प्रति लोगों की नाराजगी चरम पर है। इन समुदायों के विधायकों पर अपने क्षेत्र में विकास कार्यों में नाकामी और जनता से दूरी बनाए रखने के आरोप लगे हैं। एक स्थानीय निवासी रामप्रकाश ने कहा, “हमारे विधायक पिछले पांच साल में गिनती के दिन ही क्षेत्र में दिखे। जनता अब बदलाव चाहती है।”
मुस्लिम विधायकों के मामले में भी स्थिति गंभीर है। सर्वे के अनुसार, 84% लोगों का मानना है कि मौजूदा मुस्लिम विधायकों ने अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा, जिसके चलते उन्हें दोबारा टिकट देने का विरोध हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अनिल वर्मा ने कहा, “यह ट्रेंड दिखाता है कि यूपी में मतदाता अब परफॉर्मेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं, न कि सिर्फ जाति या धर्म को।”
यह सर्वे बीजेपी, सपा और अन्य दलों के लिए एक बड़ा संकेत है, क्योंकि कुर्मी, लोधी और जाट ओबीसी वोट बैंक का अहम हिस्सा हैं, जबकि मुस्लिम वोटर भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। बीजेपी के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि उसका ओबीसी गठबंधन अब तक उसकी ताकत रहा है। दूसरी ओर, सपा के लिए मुस्लिम वोटों में असंतोष चिंता का सबब बन सकता है। जैसे-जैसे 2027 का चुनाव नजदीक आएगा, दलों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा, वरना जनता का यह गुस्सा सत्ता के समीकरण बदल सकता है।