जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर पर यूपी में हंगामा: 10 हजार केस रुके, वकीलों ने झाड़ू लेकर कहा- गो बैक!

प्रयागराज, 25 मार्च 2025: दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर के फैसले ने उत्तर प्रदेश में सियासी और क़ानूनी तूफान खड़ा कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस तबादले का कड़ा विरोध करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिसके चलते कोर्ट में करीब 10 हजार मामलों की सुनवाई ठप हो गई। दूसरी ओर, वाराणसी में वकीलों ने अनोखा प्रदर्शन किया और कोर्ट परिसर में झाड़ू लगाकर नारा दिया, “जस्टिस वर्मा गो बैक!”

विवाद की जड़ जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर होली की रात आग लगने के बाद मिले जले हुए नोटों की भारी मात्रा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च को उनके इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर की सिफारिश की, जिसे सोमवार को मंजूरी मिल गई। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इसे “अप्रत्याशित और अपमानजनक” बताते हुए कहा, “हमारा कोर्ट कूड़ेदान नहीं है कि भ्रष्ट जज यहाँ भेजे जाएँ।” बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने मांग की कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ सीबीआई और ईडी से जांच हो और उनके सभी फैसलों की समीक्षा की जाए।

प्रयागराज में हड़ताल के पहले दिन वकीलों ने कोर्ट में कामकाज पूरी तरह बंद रखा। एक वकील, अजय मिश्रा, ने कहा, “10 हजार से ज्यादा केस लंबित हैं, लेकिन हम भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उधर, वाराणसी में वकीलों ने प्रतीकात्मक रूप से कोर्ट की सफाई की और जस्टिस वर्मा के खिलाफ नारेबाजी की। वकील रमेश सिंह ने कहा, “हम साफ-सुथरी न्यायपालिका चाहते हैं, न कि ऐसे जज जो संदेह के घेरे में हों।”

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सुप्रीम कोर्ट ने सफाई दी कि यह ट्रांसफर जांच से अलग प्रशासनिक निर्णय है, लेकिन वकीलों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। इस घटना ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर हड़ताल जारी रही, तो यूपी की अदालतों में लंबित मामलों का बोझ और बढ़ सकता है।

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