नागपुर हिंसा: अफवाहों ने भड़काई आग, शहर में तनाव
महाराष्ट्र का नागपुर शहर, जो हमेशा शांति और एकता का प्रतीक रहा है, पिछले कुछ दिनों से हिंसा की चपेट में है। 17 मार्च 2025 को शुरू हुई यह घटना औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के प्रदर्शन से उपजी। प्रदर्शन के दौरान एक धार्मिक चादर जलाए जाने की अफवाह ने आग में घी का काम किया, जिसके बाद शहर के महाल और हंसपुरी इलाकों में हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। सोमवार की रात को उपद्रवियों ने पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। करीब 60 से अधिक वाहन, जिसमें 36 कारें और 22 दोपहिया वाहन शामिल हैं, आग के हवाले कर दिए गए। पुलिस पर भी हमला हुआ, जिसमें तीन डीसीपी सहित 33 पुलिसकर्मी घायल हुए। कई घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
हिंसा के बाद नागपुर पुलिस ने सख्त कदम उठाए। अब तक 91 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 10 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें से 4 साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए दर्ज कीं। शहर के 11 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू है, और कमांडो तैनात किए गए हैं। मुख्य आरोपी फहीम शमीम खान, जो माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी का स्थानीय नेता है, को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि यह हिंसा सुनियोजित थी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे “सुनियोजित हमला” करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं, विपक्षी नेता उद्धव ठाकरे और असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर निशाना साधा, इसे गृह विभाग की विफलता बताया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी लोगों से संयम बरतने को कहा।
नागपुर की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि शहर की शांतिप्रिय छवि और विकास पर भी सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अफवाहों का तेजी से फैलना और धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग इस हिंसा के प्रमुख कारण रहे। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएगा?