राज्य में पीएम कुसुम योजना को मिल रही गति

  • दो माह में स्थापित हुए 42 मेगावाट क्षमता के 15 सोलर प्लांट

जयपुर| राज्य में पीएम कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना को तेजी मिल रही है। योजना के कंपोनेंट-सी के अंतर्गत बहरोड़-कोटपूतली जिले के बानसूर सब डिवीजन क्षेत्र में गुरुवार को एक साथ 5.26 मेगावाट क्षमता के दो सोलर प्लांट स्थापित किए गए। इन प्लांटों के माध्यम से बालावास और भूपसेड़ा ग्रिड सबस्टेशन से जुड़े 547 किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली सुलभ होगी।

15 सोलर प्लांट से 42 मेगावाट बिजली उत्पादन

बीते दो महीनों में जयपुर विद्युत वितरण निगम (जयपुर डिस्कॉम) के तहत कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी में कुल 42 मेगावाट क्षमता के 15 सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं। इनमें:

  • कोटपूतली सर्कल: 7 प्लांट
  • भिवाड़ी वृत्त: 5 प्लांट
  • जयपुर जिला उत्तर, जयपुर जिला दक्षिण, झालावाड़ वृत्त: 1-1 प्लांट

कुल उपलब्धियां

जयपुर डिस्कॉम में अब तक कंपोनेंट-सी के अंतर्गत 52.63 मेगावाट क्षमता के कुल 20 सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जो 5575 किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध करा रहे हैं।
तीनों डिस्कॉम (जयपुर, अजमेर, जोधपुर) में अब तक कुल 80.89 मेगावाट क्षमता के 31 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे 7813 किसानों को दिन में बिजली का लाभ मिल रहा है।

प्रक्रियाओं में सुधार

योजना के क्रियान्वयन को सुगम और तेज़ बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है। इसके तहत:

  • पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) को अंतिम रूप देने।
  • ट्रांसमिशन लाइन और मीटर लगाने जैसे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
  • 11 केवी और 33 केवी लाइन के अनुमोदन, संयंत्र से लाइनों को जोड़ने और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए अभियंताओं को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने का दायित्व दिया गया है।
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कुसुम योजना का महत्व

कुसुम योजना के तहत सोलर संयंत्रों से उत्पन्न बिजली से किसानों को दिन में बिजली मिल रही है, जिससे उनकी कृषि लागत कम हो रही है। साथ ही सोलर पावर जेनरेटर्स की समस्याओं को भी तेजी से सुलझाया जा रहा है।

यह पहल न केवल हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, बल्कि किसानों को आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा भी प्रदान कर रही है।

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