राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित होगा मानगढ़ धाम

 मानगढ़ का जितना महत्व धार्मिक रूप से है, उतना ही महत्व राजनीतिक रूप से भी है. क्योंकि यहां एक नहीं बल्कि तीन राज्यों के वोटर्स को साधा जा सकता है
जयपुर। बांसवाड़ा के प्रसिद्ध स्मारक एवं समाज सुधारक गोविंद गुरू की साधना स्थली मानगढ़ धाम को राज्य सरकार राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित कराएगी। इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने डीपीआर बनाने के लिए 1 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।  मुख्यमंत्री गहलोत ने विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त, 2023) पर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित कराने और 100 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य करवाने की घोषणा की थी।
ये राजस्थान का बांसवाड़ा जिले का मानगढ़ है, जिसे पॉलीटिकल सुपर लोकेशन भी कहते हैं |दरअसल इसे पॉलीटिकल सुपर लोकेशन इसलिए कहते हैं क्योंकि यहां से सिर्फ राजस्थान नहीं बल्कि एमपी और गुजरात के वोटर्स को भी साधा जा सकता है| यहां से चुनावी सभा करने का मतलब एक तीर से तीन निशानें लगाना है

क्या है मानगढ़ धाम

राजस्थान का जलियांवाला है मानगढ़ धाम जहां आजादी के आंदोलन में हजारों वनवासी हो गए थे बलिदान | बांसवाड़ा से करीब 80 किमी दूर है मानगढ़ धाम। चारों ओर पहाड़ी और जंगलों से घिरा हुआ। इस पहाड़ी की ऊंचाई करीब 800 मीटर है। गुजरात और राजस्थान की सीमा से लगती इस पहाड़ी पर एक धूणी है। यहां गोविंद गुरु की प्रतिमा लगी हुई है। साथ ही मानगढ़ से संबंधित जानकारी पत्थरों पर लिखी हुई हैं। 17 नवंबर 1913 को राजस्थान गुजरात की सीमा पर बांसवाड़ा के मानगढ़ में अंग्रेजों ने करीब 1500 से अधिक आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया था| यह इतिहास में दर्ज नहीं है लेकिन इस नरसंहार में बलिदान हुए लोगों की पीढ़ी आज भी यह दास्तान सुनाती है |

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