विश्व शांति दिवस पर प्रेम रावत का शांति संदेश

  • शांति तो हर मनुष्य के अंदर होती है लेकिन लड़ता इसलिए है कि उसके अंदर अशांति है- प्रेम रावत

अंजली श्रीवास्तव,मीरजापुर | विश्व शांति दिवस के अवसर पर गुरुवार को देर शाम बैकुंठपुर स्थित कृष्णा वाटिका मे स्वामी प्रेम रावत का शांति के संदेश को प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रसारित किया गया।उपस्थित महिला पुरुष श्रोताओं ने भाव विभोर होकर स्वामी प्रेम रावत के शांति के संदेश को आत्मसात किया।  प्रोजेक्टर के माध्यम से स्वामी प्रेम रावत ने कहा कि एक होना चाहिए, अनेक नही,जब तक इस संसार के अंदर एकता नही होगी। ये लड़ाइयां बंद नही होगी।शांति का मतलब लड़ाइयां बंद करना नही है।शांति तो हर मनुष्य के अंदर होती है।और मनुष्य लड़ता इस लिए है कि उसके अंदर अशांति है। उन्होने कहा कि बुझा हुआ दिया कुछ नही कर सकता।जलता हुआ दिया बुझाए हुए दिये को जला सकता है।खुशी अपने में ढूढो पहले,अगर तुम खुशी नही हो तो किसी और को क्या खुश करोगे। उन्होने कहा कि ये नाशवान शरीर इसमे रहते हुए आप इस अविनाशी का अनुभव कर सकते है,ये आपकी सम्भावना है,आपकी सफलता यही है।  कार्यक्रम का संचालन गौतम विश्वकर्मा ने किया । कार्यक्रम के अंत मे स्वामी प्रेम रावत की पुस्तक वितरित की गई। इस दौरान उमानाथ त्रिपाठी, नंदू गुप्ता,गीता नाथ जायसवाल,मनोज जायसवाल,डा. अजीत सिह,अशोक वर्मा ,दशरथ केशरी तथा अन्य महिला पुरुष उपस्थित रहे।

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