योग ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर स्थापित किया है

  • योग कोई मजहबी परंपरा या अभ्यास नहीं अपितु यह जीवन पद्धति है
  • तीन दिवसीय निशुल्क योग शिविर का हुआ भव्य समापन

अंजली श्रीवास्तव,मिर्ज़ापुर | पतंजलि युवा भारत व जिला योगासन खेल संघ के संयुक्त तत्वाधान में राजकीय औद्योगिक शिक्षण संस्थान गैपुरा छानबे में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना स्किल इंडिया के अंतर्गत योग का कोर्स कर रहे सभी विद्यार्थियों को राज्य महामंत्री योग गुरु योगी ज्वाला सिंह ने समापन अवसर पर सभी योग साधक साधिकाओं को सुखासन,सिद्धासन,पद्मासन, दंडासन,वज्रासन,भद्रासन, वक्रासन,चक्की चालन, पश्चिमोत्तानासन,अर्धमत्स्येंद्रासन आदि आसनों के साथ-साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराते हुए और से होने वाले लाभ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होने कहा कि सूर्य नमस्कार एक पूर्ण व्यायाम है इसके नित अभ्यास से शरीर के सभी अंग प्रत्यंग बलिष्ठ एवं निरोगी हो जाते हैं। पेट आँत आमाशय अग्नाशय हृदय फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। तथा इसका अभ्यास मेरुदंड को लचीला बनाकर इसमें आई हुई विकृतियों को दूर करता है, इसलिए प्रत्येक सुबह उगते हुए सूर्य की किरणों के सामने सूर्य नमस्कार का अभ्यास करना चाहिए उगते हुए सूर्य के सामने अभ्यास करने से किरणें त्वचा पर व शरीर पर पड़ते हैं इससे विटामिन डी का निर्माण होता है, यह विटामिन कैल्शियम फास्फोरस जैसे अति आवश्यक खनिज लवणों को शरीर के लिए अति उपयोगी बनाता है जिसके फलस्वरूप शरीर की हड्डियां भी मजबूत होती हैं इसलिए प्रत्येक मनुष्य को नियमित रूप से तीन से पांच आवृत्ति सूर्य नमस्कार का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।
इस अवसर पर उन्होंने सभी साधकों को आहार विहार के बारे में बताते हुए कहा कि शुद्ध सात्विक एवं संतुलित आहार से से ही व्यक्ति के स्वस्थ एवं सुंदर शरीर का निर्माण होता है तथा संतुलित आहार का प्रभाव केवल मनुष्य के शरीर पर ही नहीं अपितु उनके मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है। इसीलिए कहा गया है कि जैसा खाए अन्न वैसा रहे मन इसलिए हितकारी द्रव्यों का भोजन करने वाला एवं उचित मात्रा में तथा ऋतु के अनुकूल भोजन करने वाला एवं व्यक्ति सदा पूर्ण रूप से स्वस्थ व निरोगी रहता है।
इस अवसर पर जिला योगासन खेल संघ के उपाध्यक्ष अश्वनी पांडेय ने कहा कि उत्तम स्वास्थ्य ही संपूर्ण सुखों का आधार है स्वास्थ्य है तो जहान है , उत्तम स्वास्थ्य नहीं तो यह जग शमशान है। मनुष्य को अपने स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए वात पित्त एवं कफ को संतुलित बना कर रखना होगा तभी उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

यह भी देखें  Sarayuparin Brahmin Community Celebrates Grand Holi Milan in Jaipur with Colors and Culture

इस अवसर पर अनिल कुमार मौर्या ने कहां की योग कोई मजहबी परंपरा या अभ्यास नहीं अपितु योग एक वैज्ञानिक सार्वभौमिक व पंथनिरपेक्ष जीवन पद्धति है रोगियों के लिए योग एक संपूर्ण चिकित्सा तथा योग के लिए एक साधना पद्धति है अतः योग मुक्ति का मार्ग और जीवन में पूर्णता प्राप्त करने का एक साधन है। समापन अवसर पर राजकीय औद्योगिक शिक्षण संस्थान परिवार ने तीन दिनों तक निशुल्क योग का प्रशिक्षण दे रहे योग गुरु योगी ज्वाला सिंह व सहयोगी अनिल मौर्य को सम्मानित करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर मीना रॉय सविता मौर्य सरिता सिंह आशीष कुमार शिवम शुक्ला तनु गुप्ता खुशी संगीता तस्मिया आदि लोग उपस्थित रहे।

About Author

Leave a Reply

error: Content is protected !!