सिंधु में पानी या खून बहेगा – बिलावल भुट्टो | The Newswala

इस्लामाबाद, 26 अप्रैल 2025: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया है। सुख्खुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिलावल ने कहा, “सिंधु हमारी है और हमारी ही रहेगी। इसमें या तो हमारा पानी बहेगा, या फिर भारतीयों का खून।” यह बयान भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के फैसले के जवाब में आया है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। भारत ने इस हमले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जोड़ा और जवाबी कार्रवाई के तौर पर सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। भारत के जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि पाकिस्तान को सिंधु का “एक बूंद पानी” भी न मिले।

 

सिंध प्रांत के सुख्खुर में सिंधु नदी के किनारे रैली को संबोधित करते हुए बिलावल ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मोदी अपनी कमजोरियों को छिपाने और अपने लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए पहलगाम हमले का बहाना बना रहे हैं। भारत ने एकतरफा रूप से सिंधु जल संधि को निलंबित किया, जिसके तहत उसने माना था कि सिंधु पाकिस्तान की है।” बिलावल ने दावा किया कि सिंधु नदी पाकिस्तान की सभ्यता और पहचान का हिस्सा है, और वह इसके लिए “लड़ने” को तैयार हैं। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण भारत को, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया। यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव के कारण इसका उल्लंघन होने की आशंकाएं बढ़ी हैं। भारत का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने के कारण संधि को “सद्भावना” के साथ लागू करना संभव नहीं है।

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बिलावल के बयान ने न केवल भारत-पाकिस्तान तनाव को बढ़ाया है, बल्कि पाकिस्तान के अंदर भी जल वितरण को लेकर विवाद को हवा दी है। सुख्खुर रैली में बिलावल ने सिंध प्रांत के पानी के अधिकारों की रक्षा के लिए PPP की लड़ाई को भी रेखांकित किया। हाल ही में पंजाब सरकार और सेना द्वारा शुरू किए गए चोलिस्तान नहर परियोजना को सिंध में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बिलावल ने कहा कि उनकी पार्टी की वजह से केंद्र सरकार ने बिना सहमति के नई नहरें बनाने का फैसला रद्द किया। बिलावल के बयान पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली के मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने जवाब में कहा, “बिलावल को चाहिए कि वे सिंधु में डूब जाएं। उनके पास खून बहाने की हिम्मत नहीं है। पानी के लिए रो रहे हैं और खून की बात करते हैं।” भारत ने स्पष्ट किया है कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिसमें राजनयिक संबंधों को और कम करना और पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी शामिल है।

बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान भारत के “अवैध और अमानवीय” फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाएगा। उन्होंने दावा किया कि भारत का संधि निलंबन अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। दूसरी ओर, भारत ने संधि के अनुच्छेद XII(3) का हवाला देते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय बदलाव, स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतें और पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थन संधि की समीक्षा के लिए आधार हैं। बिलावल के बयान ने भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई तल्खी पैदा कर दी है। पाकिस्तान ने 1972 के शिमला समझौते को निलंबित करने की धमकी दी है, जबकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर अडिग रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर तब जब सिंधु नदी पाकिस्तान के 80% कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

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