भागवत मोक्ष का पुराण है – पं० दिलीप कृष्ण
अंजली श्रीवास्तव,मीरजापुर | सत् सन्दोह आश्रम, हांसापुर,अदलहाट के तत्वावधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन मंगलवार को भक्तों को संबोधित करते हुए कथा वाचक आचार्य पं दिलीप कृष्ण ने कहा की आज की कथा अवतारों की कथा है।पंचम सत्र की कथा में उन्होंने कहा की भागवत मोक्ष का पुराण है।हमारे शास्त्र में महाभारत सीखाता है की जीवन में हमें क्या नहीं करना चाहिए रामायण सीखाती है की हमें जीवन में क्या करना चाहिए।
श्रीमद्भागवत जो हमें हमारी मृत्यु को महोत्सव बना देता है।
श्रीमद्भागवत मे भगवान को दशावतार कहा जाता है। उन्होंने दीती के पुत्र हिरणाक्ष के बारें में वर्णन करते हुए कहा कि हिरन का अर्थ सोना ,अक्ष का अर्थ आँख होता है अर्थात जो व्यक्ति किसी दूसरे के धन,वस्तु पर सोने की आँख जैसी नजर होती है उसका विनाश हिरणायक्ष की तरह तय है। कथा में ग्रह व गज की कथा,समुद्र मंथन की कथा,भगवान वामन अवतार की कथा व सबसे मनमोहक दिव्य कृष्ण के जन्म की कथा का श्रवण कराया। कथावाचक आचार्य दिलीप ने कहा की जीवन मे कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।जहाँ अहंकार होता है वहाँ ओंकार नहीं होते है जहाँ ओंकार होते है वहाँ अहंकार नहीं होता है।उन्होंने कथा में आगे मृत्यु के विषय में वर्णन करते हुए बताया की जो गीता में कृष्ण ने 12 वी अध्याय में अर्जुन से कहा की कान के बगल का बाल जैसे सफेद होता है वैसे ही ईश्वर हमें अपनी मृत्यु के लिए संकेत करता है। उन्होंने शरीर को पंचायती भवनशाला बताते हुए कहा की जिस दिन बड़ी अदालत भगवान का निर्णय आयेगा हमें इस मानव शरीर को खाली करना होगा। कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान प्रोफेसर भवभूति मिश्र द्वारा विधि विधान से पूजन व आरती के साथ किया गया। संचालन मोहन शुक्ल ने किया। इस अवसर पर सुनीति मिश्रा,बैकुंठ द्विवेदी, बलदेव पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रविन्द्र द्विवेदी,जयप्रकाश त्रिपाठी,सुरेश कुमार,पंडित कृष्णानंद शुक्ल, डा. देवनारायण सिंह, प्रो वीरेन्द्र सिंह एवं प्रो. शिशिर उपाध्याय, मोनिका, अनुराधा, उर्मिला, विनोदिनी सहित अन्य श्रोतागण उपस्थित रहे।