जावेद का “अख्तर “ हो जाना – हेमंत

अपने देश में हमें सत्तापक्ष या विपक्ष से नाराजगी हो सकती है। हम अपने घर में झगड़ भी सकते हैं, रूठ भी सकते हें और मान भी सकते हैं। लेकिन जब हम किसी दूसरे मुल्क में होते हैं तो हमें केवल भारतीय होना चाहिए। खास तौर पर हमारे नेताओं को। वहां सत्ता वाले भी हमारे और विपक्ष वाले भी हमारे। शायर/ लेखक जावेद अख्तर ने पाकिस्तान में जो भी कहा, ऐसा हर भारतीय को कहना चाहिए। जावेद अख्तर सीधा- सीधा और मुंह पर बोलने वाले हैं। वो अरविंद केजरीवाल से भी कड़वा पूछते हैं तो किसी एंकर को भी नेशनल टीवी पर हड़का देते हैं। इस बेबाकी के चक्कर में वे कई बार विवादों में भी फंस जाते हैं।
खैर दो दिन से देश भर में जावेद अख्तर की चर्चा हो रही है। पाकिस्तान ने उन्हें फ़ैज़ फेस्टिवल में बुलाया था। वे जावेद अख्तर का कद जानते हैं सो उनसे सवाल भी हुए। सवाल निश्चित तौर पर चुभने वाले थे लेकिन जावेद अख्तर के जवाब ने उस मुल्क के लोगों को निरुत्तर कर दिया। उन्होंने कहा कि मुंबई हमला नार्वे या इजिप्ट से आए लोगों ने नहीं किया था। हमला करने वाले अभी भी आपके मुल्क में घूम रहे हैं। दूसरा ये कि पाकिस्तान के कलाकारों महदी हसन, नुसरत आदि के लिए भारत में हमेशा बड़े बड़े मंच दिए। शायर फैज साहब को भी हेड ऑफ द स्टेट जैसा सम्मान मिलता था। लेकिन पाकिस्तान ने कभी लता जी का कार्यक्रम नहीं रखा। इन बातों के चलते जावेद साहब दो दिन से अख्तर (तारा) हुए पड़े हैं।  हां मुंबई में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के कार्यक्रम में बिना टिकट के घुसना और उनके स्वीट में ही रात बिताने का मजेदार किस्सा उन्होंने हाल ही में लल्नटॉप के एक कार्यकम में सुनाया था। इसे जितनी बार देखो हंसे बिना नहीं रह पाते। वक्त वक्त की बात है। तब वे अपने ही देश में फ़ैज़ साहब को सुनने नहीं जा सकते थे। अब उन्हीं फ़ैज़ साहब की याद में उनके ही देश में आयोजित कार्यकम में वे पूरे पाकिस्तान को आईना दिखा आए।

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