अतीक अहमद और मीडिया की शर्मनाक ”महाकवरेज”

आने वाले समय में मीडिया की हेडलाइंस कुछ ऐसी होने वाली हैं- “मीडिया की कड़ी सुरक्षा के बीच अपराधी/ आरोपी को फलां से फलां जगह ले जाया गया”। कल हमारे देश के तमाम चैनलों में अतीक अहमद की गुजरात से यूपी की “महायात्रा” की “महाकवरेज” ही चली। हमने इस हाइप्रोफाइल क्रिमिनल को पेशाब करते हुए भी लाइव देखा। वो भी देश के सबसे बड़े टीवी चैनलों पर। अब और क्या देखना शेष है? मजे की बात देखिये कि हर चैनल कह रहा था कि वे साबरमती से प्रयागराज तक निरंतर उनके पीछे लगे हुए हैं। सभी इसे अपनी-अपनी महाकवरेज कह रहे थे। एक राष्ट्रीय चैनल की गाड़ी काफिले से आगे चल रही थी तो रिपोर्टर की कमेंटरी कमाल की थी। गाड़ी में बैठा अतीक क्या सोच रहा होगा? क्या वो डरा हुआ होगा या यूपी जा कर डरेगा? जो मुंह में आ रहा था बोले जा रहे थे। वेब पोर्टल भी यही सब कर रहे थे। मीडिया वालों ने पूरी की पूरी टीमें झोंक दीं थी इस मामले में। क्या- क्या नहीं दिखाया। कुछ भी नहीं छोड़ा। ऐसा लग रहा था कि सुरक्षा कर्मियों के सामने अतीक को मीडिया से बचा कर सुरक्षित यूपी पहुंचाना बहुत बड़ी चुनौती थी।
इस सारे ड्रामें से क्या हासिल होना था? गजब के हैं जी हम मीडिया वाले। कौन सा देश हित था इस महाकवरेज में? एक क्रिमिनल को ले जाया जा रहा था एक जेल से दूसरी जेल। बस इतना ही तो था। शायद मीडिया वालों को लग रहा था कि अतीक का एनकाउंटर हो जाएगा। बस उसी एनकाउंटर की लाइव कवरेज के चक्कर में बेचारे रात दिन दौड़े रहे। हद है वैसे। एक मिनट के लिए मान लेते हैं (Hypothetically)कि यूपी पुलिस अतीक का एनकाउंटर करना चाहती थी। तो क्या मीडिया वालों से इसका लाइव करवाती? जाहिर है नहीं करवाती। तो क्या मीडिया वाले अतीक अहमद को बचाने के लिए साथ-साथ चले हुए थे? हा-हा- हा…। कुछ भी। वैसे इस सवाल पर आप हंस सकते हैं। हंसना भी चाहिए। मीडिया आज सबसे बड़ा मजाक बनने की यात्रा पर निकला हुआ है।

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– हेमंत

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