नीतीश की बढ़त से ममता की घटत

इस सप्ताह बिहार में राजनीतिक हलचल तथा सत्ता पलट ने एक अजीब हालात पैदा कर दिये हैं । हालांकि भारतीय जनता पार्टी इस तरह प्रतिक्रिया दे रही है जैसे उसे इस बात का अहसास था पर यह इतनी आसानी से पच जाने वाली शिकस्त नही कही जा सकती । हर माहौल की पक्की खबर रखने वाली भारतीय जनता पार्टी लालू तेजस्वी और नीतीश की गुपचुप मुलाकातो  पर नजर ही रख सकी ।उसकी नाक के नीचे इतना बड़ा कांड हो गया और आर सी पी सिंह हाथ मलते रह गये ।खैर ,यह तो रही एक बात कि राजनीति में सब जायज है और सत्ता को पाना ही नेता का एकमात्र लक्ष्य होता है। अब मामला जरा ममता बनर्जी की तरफ पलटकर भी देखा जाना चाहिए  ममता बनर्जी और कांग्रेस के शीत युद्ध की बात छिपी नहीं रह गई है ।ममता किसी भी हालत मे सोनिया और प्रियंका गांधी को विपक्ष का चेहरा बनने नहीं देना चाहती हैं । जिसका प्रमाण अभी पिछले दिनो का उप राष्ट्रपति चुनाव रहा जब तृणमूल कांग्रेस इससे अलग रही और अभी कांग्रेस पर ईडी कार्यवाही पर भी ममता ने मुँह मे दही जमा रखा है ।वो किसी भी हालत मे प्रधानमंत्री पद की दावेदारी साबित करना चाह रही है पर अभी बिहार के नीतीश कुमार घटनाक्रम ने ममता को दो ही दिन मे हाशिये पर ढकेल दिया है ।अब विपक्ष वापस मजबूत होता दिखाई दे रहा है जिसकी रहनुमाई करेंगे नीतीश कुमार।यो भी देश में शख्सियतों का आकलन करें तो नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं। आज कोई दावा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनमें प्रधानमंत्री बनने के सभी गुण हैं. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शरद यादव ने भी साफ किया है कि नीतीश कुमार आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. हालांकि, नीतीश कुमार ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया। मगर यह सच है कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा रखने वाले नेताओं में से एक हैं  ऐसे नेताओं की लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल है ।और यो भी जहां तक ​​भ्रष्टाचार के आरोपों का सवाल है, नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बेदाग रहा है, लेकिन एक बात जो उनके खिलाफ है, वह कई बार गठबंधन बदलते रहे हैं। उन पर सर्वसामान्य फैसला नही लिया जा सकता।मगर एक बयान ने दो दिन से हलचल मचा दी है ।पत्रकारो से बात करते हुए नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट कहा कि ’14 में जो आए थे, वो 24 तक आगे रह पाएंगे कि नहीं…’ यानी नीतीश कुमार ने मौजूदा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।बिहार के सीएम नीतीश कुमार का ये बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर वो इस तरह की बयानबाजी से बचते हैं. साथ ही दस साल पहले  जब से नरेंद्र मोदी को बीजेपी का चेहरा घोषित किया गया था, तब से ही नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। नीतीश ने पहली बार बीजेपी से गठबंधन भी इसीलिए तोड़ा था।



अब जबकि नीतीश एक बार फिर बीजेपी से अलग हुए हैं तो उन्होंने बिना नाम लिए निशाने पर पीएम मोदी को ही ले लिया है. इससे ये भी समझा जा रहा है कि वो खुद तो कहीं 2024 की तैयारी में नहीं हैं।फिलहाल हर चैनल हर बहस मे एक बात हो रही है कि अगले प्रधानमंत्री के लिए  नीतीश कुमार जितना अनुभवी सीएम कोई नहीं है। इसका मतलब कुछ तो पक रहा है ।कुछ तो है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2024 की बात के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी टक्कर देने लगे।  माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में विपक्ष के साझा प्रधानमंत्री पद के चेहरे होंगे । हिदी भाषी राजयो में लोकसभा की आधे से अधिक सीटें हैं। हिंदी पट्टी में पिछड़े वर्ग से आने वाले नीतीश कुमार एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी साफ सुथरी छवि होने के साथ समाजवाद का तमगा भी है।आज तक भाजपा को नरेंद्र मोदी के उम्मीदवार होने से उनके अति पिछड़ा होना, साफ सुथरी छवि होना और हिंदुत्ववादी चेहरा होने का लाभ मिलता रहा है  इसकी काट में नीतीश कुमार के पक्ष में बिहार में किये गये ऐसे कई कार्यों के नाम हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर नजीर बना  खुद प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर कहा कि नीतीश बाबू से बड़ा गरीबो का हितैषी आज कोई  नहीं।यह सब बिंदु बहुत अहम है । इससे ममता की महत्वाकांक्षा को ग्रहण लग जायेगा। ममता को मन ही मन खारिज कर चुकी कांग्रेस भी नीतीश की पैरवी करेगी ।यानि ममता बनर्जी का पत्ता साफ होगा और वो वापस अपने पश्चिम बंगाल और वहीं की राजनीति में रमी रह जायेगी।
– हरीश चंद्र पांडे

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