धनखड़ की जीत के मायने – हरीशचंद्र पांडे

राजस्थान के खास और दमदार जाट समुदाय से जुड़ाव रखने वाले एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ भारत के नये उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो गये हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए कराये गये चुनाव में जगदीप धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया। जगदीप धनखड़ वर्तमान उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू की जगह लेंगे। देखा जाये तो आंकड़े शुरू से ही पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के पक्ष में थे। एनडीए उम्मीदवार के नाते उन्हें भाजपा और जनता दल युनाइटेड के सांसदों का तो समर्थन प्राप्त था ही साथ ही वाईएसआर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, बीजू जनता दल, अन्नाद्रमुक और शिवसेना ने भी समर्थन दिया था। शुरू से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि धनखड़ को पाच सौ से ज्यादा मत हासिल होंगे। खास तौर पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से उपराष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेने से धनखड़ की विजय तय थी। तृणमूल कांग्रेस के दोनों सदनों में मिलाकर उनचालीस सांसद हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के दो बागी सांसदों- शिशिर अधिकारी और दिव्येंदु अधिकारी ने मतदान में भाग लिया।पर यह भि माना जा रहा है कि उन्होंने धनखड़ के पक्ष में ही मतदान किया।ममता बनर्जी हमेशा ही धनखड की धुर विरोधी रही पर यहाँ उनका धनखड को उच्चतम वोट दिलाने मे योगदान देखकर समूचा देश स्तब्ध है ।



कदाचित वो कांग्रेस की जड और खोखली करना चाहती है और मन ही मन खुद को राष्ट्रीय नेतृत्व मे कांग्रेस सोनिया और प्रियंका से अधिक ताकतवर तथा लोकप्रिय बनाना चाहती है ।बहरहाल धनखड के उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने से राजस्थान का कृषक वर्ग उत्साहित है । एक साधारण किसान परिवार में पैदा होकर अपनी गुणवत्ता के बल पर देश के उच्चतम पदों तक पहुंचे धनखड एक अनुशासनप्रिय राजनीतिज्ञ हैं। ममता बनर्जी के साथ उनकी खींचतान काफी चर्चा का विषय बनी रही लेकिन वे स्वभाव से विनम्र और सर्वसमावेशी हैं। हमारी राज्यसभा को ऐसा ही सभापति आजकल चाहिए, क्योंकि उसमें विपक्ष का बहुमत है और उसके कारण इतना हंगामा होता रहता है कि या तो किसी भी विधेयक पर सांगोपांग बहस हो ही नहीं पाती है या फिर सदन की कार्रवाई स्थगित हो जाती है।उप राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद इस सत्र के अंतिम दो दिन की अध्यक्षता वे ही करेंगे। वे काफी अनुशासनप्रिय व्यक्ति हैं लेकिन अब वे अपने पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए पक्ष और विपक्ष में सदन के अंदर और बाहर तालमेल बिठाने की पूरी कोशिश करेंगे ताकि भारत की राज्यसभा, जो कि उच्च सदन कहलाती है, वह अपने कर्तव्य और मर्यादा का पालन कर सके। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ को अब शायद विपक्षी सांसदों को बाहर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यो भी भाजपा ने उनको उप-राष्ट्रपति पद के योग्य समझकर चौतरफा जाम तो बिछा ही दी है ।राजस्थान मे चुनाव भी होने है और जाट समाज की पूरी सहमति यानि सौ फी सदी वोट भारतीय जनता पार्टी अपने हक मे चाहती है ।अब आगे सब सकारात्मक होगा ऐसी उम्मीद है ।



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