ना दल चाहिए ना बल चाहिए, उन्हें सिर्फ रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया चाहिए

पत्रकार कमलेश शर्मा की कलम से स्पेशल रिपोर्ट…….

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया उतर प्रदेश का वह नाम है, जिसके आगे हर कोई झुकता है. लाखों लोगों के दिलों में राज करने वाले रघुराज प्रताप सिंह कई दशकों से विधायक बनते आ रहे हैं. जंहा हर बार वोटों की संख्या बढती नजर आती है. उतर प्रदेश के लिए यह नाम वो है जिसके ऊपर कुंडा की जनता हर बार बिना किसी दल – बल के मोहर लगाती आ रही है. रघुराज प्रताप सिंह का जन्म 31 अक्टूबर 1969 को कलकत्ता में हुआ था. उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह अवध एस्टेट के शाही परिवार से हैं. राजा भैया के दादा पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय के संस्थापक वाइस-चांसलर थे और बाद में वह हिमाचल प्रदेश के दूसरे राज्यपाल बने. राजनीति में करियर बनाने वाले रघुराज प्रताप सिंह अपने परिवार के पहले व्यक्ति हैं. रघुराज प्रताप सिंह के दादा ने अपने भतीजे और राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह को पुत्र के रूप में अपनाया था. राजा भैया के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध रघुराज प्रताप सिंह वर्ष 1993 से लगातार निर्दल प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित होते आ रहे हैं। वर्ष 2007 के चुनाव में रघुराज प्रताप सिंह ने 73,732 मत हासिल करके बसपा प्रत्याशी शिव प्रकाश सेनानी को 53,128 मतों से हराया था। वर्ष 2012 में रघुराज प्रताप सिंह का जीत का अंतर बढ़ गया। इस चुनाव में 1,11,392 मत पाकर रघुराज चुनाव जीते। बसपा प्रत्याशी शिव प्रकाश सेनानी को 88,255 मतों से हराया। तो वही वर्ष 2017 के चुनाव में रघुराज प्रताप सिंह ने रिकार्ड कायम करते हुए 1,03,353 मतों से जीत दर्ज की। 1,36,223 मत पाकर उन्होंने भाजपा प्रत्याशी जानकी शरण पांडेय को हराया। जानकी को 32,870 मत और तीसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी परवेज अख्तर को 17,176 मत मिले थे। पिछले तीन चुनावों में सपा ने उन्हें समर्थन दिया था। इस बार भाजपा, कांग्रेस और बसपा की तरह सपा भी उनके सामने प्रत्याशी उतारेगी। ऐसा में माना जा रहा है कि कुंडा विधानसभा में भी रोमांचक मुकाबला हो सकता है। ऐसे में कुंडा का नया राजा कौन होगा। इसके बारे में तो 10 मार्च को ही पता चलेगा।

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राजा भैया का राजनीतिक करियर

1993 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक के तौर पर लगातार जीत दर्ज करने वाले बाहुबली राजा भैया का राजनीतिक सफर में कई कठिनाइयों ने डेरा डालने की कोशिश की लेकिन राजा भैया के सामने ज्यादा समय तक वह चल नहीं सकी, हालांकि एक बार उन्हें जेल जाना पड़ा . गौरतलब है कि 2002 में भाजपा नेता पूरन सिंह बुंदेला ने राजा भैया पर कथित तौर पर अपहरण और धमकी देने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया. तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2 नवंबर 2002 को रघुराज प्रताप सिंह को गिरफ्तार करवाया. बाद में मायावती के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने राजा भैया को आतंकवादी घोषित कर दिया और राजा भैया, उनके पिता उदय प्रताप सिंह और चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को पोटा कानून के तहत जेल में डाल दिया गया. 2002 और 2007 के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भी राजा भैया निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीते और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री बने. आपको बता दे कि इससे पहले भी वह कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री रहे. 2017 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे राजा भैया ने अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी भाजपा के जानकी शरण को 1 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था. 2017 में जीत के साथ ही वह लगातार छठी बार कुंडा विधानसभा से जीतकर विधानसभा पहुंचे. साल 2018 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन किया और उसका नाम जनसत्ता दल लोकतांत्रित रखा.

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गुरुजी देवरहा बाबा का आशीर्वाद ने दिलाई राजा भैया को लगातार जीत

प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया चुनाव के चलते एक बार फिर चर्चा में हैं। अयोध्या से चुनाव प्रचार की शुरुआत करने वाले राजा भैया ने साफ कर दिया है कि इस बार वह मिलती-जुलती विचारधारा वाले दलों से ही गठबंधन करेंगे। राजा भैया को लगातार जीत के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, ‘इकलौती संतान होने के बाद भी माता-पिता ने मुझे बहुत अनुशासन में रखा। वह चाहते हैं कि मैं जमीन से हमेशा जुड़ा हुआ ही रहूं। यही वजह है कि आज भी कुंडा की जनता मुझे पसंद करती है,राजा भैया ने एक इंटरव्यू के दौरान उनके राजनीतिक गुरु के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, ‘हमारे ऊपर हमेशा गुरुजी देवरहा बाबा का आशीर्वाद रहता है। हम आज जो भी बन पाएं हैं वो सिर्फ उनके आशीर्वाद के कारण ही बन पाए हैं। उनकी कृपा से ही हमने अपने जीवन में हर चीज पाई है। अब चाहे वो राजनीति हो या निजी जीवन में हम हर चीज का शुभारंभ उनके आशीर्वाद से ही करते हैं।’

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