देवरिया के मेहरौना से सिवान के गुठनी क्षेत्र में पेट्रोल की तस्करी

 

  • गैलन में पेट्रोल ले जाना गैरकानूनी-अधिवक्ता
  • थानाध्यक्ष ने कहा- हमें पकड़ने का अधिकार नहीं
  • ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा-जांच कराऊंगी

देवरिया। जिले का लार थाना क्षेत्र स्थित मेहरौना बॉर्डर तस्करी के लिए कुख्यात है। गोवंश व शराब की तस्करी के बाद इन दिनों मेहरौना से पेट्रोल की तस्करी बिहार को हो रही है। यूपी में देवरिया जिले के मेहरौना व बिहार में सिवान के गुठनी में महज तीन किमी का फासला है। इस तीन किलोमीटर की दूरी में पेट्रोल के दाम में 12 रुपये लीटर का अंतर है। इस कारण बिहार के कालाबाजारियों ने मेहरौना से पेट्रोल की तस्करी शुरू कर दी है। नियमतः पेट्रोल केवल वाहनों में ही दिया जा सकता है। गैलन में पेट्रोल ले जाना गैर कानूनी है। पेट्रोल में 12 रुपये का अंतर होने का भरपूर लाभ तस्कर उठा रहे हैं। कालाबाजारी कर गुठनी क्षेत्र में मेहरौना से ले जाकर पेट्रोल टँकी से दो रुपये कम के रेट पर 10 रुपये का फायदा लेकर बेचा जा रहा है। बिहार के मैरवा ,गुठनी में पेट्रोल प्रति लीटर 107.34 रुपये जबकि यूपी के मेहरौना बॉर्डर के पंप पर पेट्रोल प्रति लीटर 95.07 है। लार थाना क्षेत्र के नदौली निवासी अधिवक्ता पंडित प्रियेशनाथ त्रिपाठी ने बताया कि इन दिनों बिहार में डीजल-पेट्रोल महंगा होने के कारण मेहरौना के पेट्रोल पंप पर तेल की बिक्री बढ़ गई है।
इस संबंध में जब लार के प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें पेट्रोल पकड़ने का अधिकार नहीं है। मजिस्ट्रेट ही पेट्रोल पकड़ सकता है। सलेमपुर की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजन द्विवेदी से जब शिकायत की गई तो उन्होंने कहा कि जांच कराऊंगी।
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आईपीसी की धारा 285 में कार्रवाई का है अधिकार
इस संबंध में अधिवक्ता पंडित प्रियेशनाथ त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 285 के अनुसार, जो कोई अग्नि या किसी ज्वलनशील पदार्थ से कोई कार्य ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से करेगा जिससे मानव जीवन संकटग्रस्त हो जाए या जिससे किसी अन्य व्यक्ति को चोट या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, अथवा अपने कब्जे में संग्रहीत अग्नि या किसी ज्वलनशील पदार्थ की ऐसी व्यवस्था करने का, जो मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड, या दोनों से दण्डित किये जाने का प्राविधान है।

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