लार सीएचसी पर एक महिला डॉक्टर नहीं, यूपी में खुलेंगे पांच हजार स्वास्थ्य उपकेंद्र

लार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओँ का आधारभूत ढांचा बेहतर बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में पांच हजार नए स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाने हैं। इससे जुड़ी सभी तैयारी जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए। वह मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर उच्चाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाके के लोगों की सेहत सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैँ। नए केंद्रों के खुलने से इन योजनाओं को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इन सभी केंद्रों पर चिकित्सीय उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ  की जल्द से जल्द व्यवस्था करे।

मुख्यमंत्री की यह घोषणा काफी सकूं देने वाली है लेकिन क्या योगी के अफसर उनतक यह बात पहुंचा पाते हैं कि ग्रामीण अंचल के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अभी महिला चिकित्सकों का अभाव चल रहा है। देवरिया जनपद का लार सीएचसी जिसे मिनी जिला अस्पताल कहा जाता है यहाँ 30 शैया का प्रसूति पंख नामक अस्पताल है। हालत यह है कि यहाँ किसी महिला चिकित्सक की तैनाती ही नहीं है जिसके चलते यह अस्पताल केवल दिखावटी साबित हो रहा है। यहाँ के अधीक्षक डॉ बीवी सिंह कई बार पत्र भेज चुके लेकिन इस अस्पताल पर एक अदद महिला चिकित्सक की तैनाती भी नहीं हुई। अब तो लोग सवाल करने लगे हैं कि क्या अस्पताल की बिल्डिंगों के खड़ा कर दिए जाने मात्र से लोगों का इलाज हो जाएगा। सरकार भले बड़े बड़े दावे करे लेकिन धरातल पर स्थिति ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के बेहतर इलाज का यहाँ कोई प्रबन्ध नहीं है। सीएचसी लार पर महिला चिकित्सक व बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है। लोग सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विपक्ष के लोग इस मुद्दे पर हमलावर हैं। सत्ताधारी दल के छोटे पदाधिकारी सरकार के बचाव में दलीलें दे रहे हैं। कुछ लोगों का इस मुद्दे पर मन टटोला गया।
युवा समाजसेवी वरुण मिश्र कहते हैं कि लार सीएचसी का क्षेत्र बहुत बड़ा है। यहाँ मिनी जिला अस्पताल जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन महिला डॉक्टर बगैर सब बेकार है। दीजेन्द्र नाथ इसके लिए प्रभारी को ही जिम्मेदार बता रहे हैं। जितेंद्र चौधरी कहते हैं कि सरकार बदलेगी तो व्यवस्था बदलेगी। पिंडी निवासी डॉ अविनाश पति त्रिपाठी कहते हैं कि कांग्रेस की सरकार उत्तर प्रदेश में बनते ही यह मांग पूरी होगी। भाजपा के सांसद, विधायक , प्रमुख , नगर पंचायत अध्यक्ष एक महिला डॉक्टर नही तैनात करा पा रहे हैं, यह उनकी कार्यक्षमता को दर्शा रहा है। रोपनछपरा निवासी व भाजपा के लार मंडल मंत्री त्रिभुअन प्रताप सिंह कहते हैं कि मूल समस्या है , चिकित्सको का ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से कतराना। ज्यादातर डाक्टर अनुबंध के आधार पर नियुक्त होते हैं। सरकारी क्षेत्र की चिकित्सा सेवा के क्षेत्र मे आज के डाक्टर लगभग नही आना चाहते। महानगर सहित नगरों मे यह समस्या कम है। चिकित्सक को कानून के दायरे मे लाकर ग्रामीण क्षेत्र मे सेवा को कुछ वर्षों के लिये अनिवार्य कर देना चाहिए। माननीय जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकार का प्रयोग करके बहस के दौरान इन मुद्दों को अवश्य रखना चाहिए। ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त रखना चुनौती भी है और आवश्यक भी है। कौसड़ निवासी शिक्षक प्रसेनजित सिंह कहते हैं कि यह अस्पताल जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। प्राइवेट चिकित्सक गरीब लोगों को लूट रहे हैं। सरकार की मुफ्त स्वास्थ्य सेवा लार में धराशायी हो चुकी है।

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अस्पताल पर महिला डॉक्टर के लिए कई बार पत्र शासन को लिख चुका हूं। जिले में चार महिला चिकित्सक आईं तो यह आशा बंधी थी कि एक को लार में तैनात किया जाएगा, लेकिन यहाँ किसी की तैनाती नहीं हुई।
– डॉ बृजवासी सिंह
अधीक्षक, सीएचसी-लार

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