अब कलक्टर-कप्तान सुनेगें भाजपा पदाधिकारियों की बात
- ब्यूरोक्रेसी के चलते जनता का रुख हो रहा था सरकार से विमुख
एम के निल्को की रिपोर्ट
लखनऊ। यूपी में अब बदलाव नजर आएगा। जिन भाजपा पदाधिकारियों की नहीं सुनी जाती थी , उनकी सुनी जाएगी। यह सब तब सम्भव हुआ जब सत्ता और संगठन में बदलाव के संकेत केंद्र से आये। कुर्सी का मोह तो सभी को होता है। जब सत्ता में बदलाव की सुगबुगाहट हुई तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली दरबार मे शिष्टाचार मुलाकात करने पहुंच गए। योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अंदरखाने की चर्चा के मुताबिक अब केंद्र यूपी पर निगाह रखेगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब हर माह यूपी में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। ये सब इस लिए भी होगा कि यूपी में 8 माह बाद विधान सभा के चुनाव हैं।
पंचायत चुनाव में खराब प्रदर्शन का जमीनी हकीकत पार्टी संगठन को पता चल चुका है। पिछले काफी समय से सरकार से लेकर संगठन तक दुविधा की स्थिति रही है। अफसर केवल योगी से डरते हैं। कई मंत्री, सांसद, विधायक तक की बात जिले स्तर तक के अधिकारी नहीं सुनते थे। छोटे पदाधिकारी तो बस पद लेकर घरों में दुबके पड़े थे। जुगाड़ वाले लोगों की प्रशासनिक आधार पर वर्ष भर ट्रांसफर-पोस्टिंग गुपचुप तरीके से होती रही है। घोषणाएं तो बहुत हुई , धरातल पर पहुंचने में बिलम्ब से आम जनता दुखी हो रही। चुनाव ड्यूटी में कोविड से जान गंवाने वाले कर्मियों को तो सहायता का मामला प्रोसेस में ही हैं। जो घोषणा हुई उनकी धनराशि मृतकों के उत्तराधिकारी के खाते में नहीं पहुंची।बड़ी संख्या में आम लोगों ने कोविड से जान गंवाई है। ऐसे सामान्य परिवारों की कोई मदद नहीं हो सकी है।कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन नहीं हो सका है। उच्च स्तर के निर्देश के बावजूद कार्यवाही अटकी है। कर्मचारियों में जबर्दस्त नाराजगी है। शिक्षा व राजस्व लेखपाल सहित तमाम संवर्गों के कर्मियों को कई-कई वर्ष से पदोन्नति नहीं मिल सकी है। इससे इन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। इन्हें पदोन्नति का इंतजार है।
शिक्षामित्रों को नियमित नहीं किया गया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की आठ पुरानी भर्तियों की लिखित परीक्षा का इंतजार है। आयोग ने द्विस्तरीय प्रणाली से नई भर्ती की कार्यवाही शुरू कर दी लेकिन पुरानी पर चुप्पी है। इन भर्तियों से जुड़े अभ्यर्थी भर्ती पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।राजस्व परिषद के चेयरमैन का पद डेढ़ महीने से अधिक समय से खाली है। राजस्व प्रशासन से जुड़े परिषद स्तर पर होने वाले नीतिगत सारे कार्य ठप हैं। राजस्व से जुड़े कार्मिकों की समस्याओं पर भी निर्णय नहीं हो पा रहा है। इन सब के बावजूद भी बहुत से काम अवशेष हैं।
उक्त के अलावा सर्व समाज को साथ लेकर चलने की जगह कुछ खास वर्ग की ही तूती प्रदेश में बोलती नजर आ रही थी। अब यह सब बदलेगा। इसके लिए केंद्र बड़े पैमाने कार्य योजना तैयार कर रहा है।2022 में फिर कमल खिलाने की पूरी तैयारी शुरू हो रही है। अब कलक्टर-कप्तान पार्टी पदाधिकारियों की सुनेंगे।