बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक समेत 4 बैंकों को बेचने की तैयारी

एम के निल्को, लखनऊ | केंद्र सरकार ने 4 सरकारी बैंकों का निजीकरण करने का मन बना लिया हैं। इसमें से 3 बैंक छोटे हैं। एक बड़ा बैंक है। तीन छोटे बैंकों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक हैं। जबकि बड़ा बैंक है- बैंक ऑफ इंडिया। इनके प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू होने में 5-6 महीने लगेंगे।

हालांकि हजारों कर्मचारियों की मौजूदगी वाले बैंकिग सेक्टर में निजीकरण राजनीतिक तौर पर एक जोखिम भरा काम है क्योंकि इससे नौकरियों पर संकट आ सकता है। बैंक यूनियन्स के एक अनुमान के मुताबिक, बैंक ऑफ इंडिया में लगभग 50000 कर्मचारी हैं। वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में में 33000, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लगभग 13000 और इंडियन ओवरसीज बैंक में 26000 कर्मचारी हैं। सूत्रों का कहना है कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र में कम कर्मचारी होने के चलते उसका निजीकरण आसान रह सकता है और हो सकता है कि इसके चलते उसे ही सबसे पहले प्राइवेट बनाया जाए।

जानें क्या है मोदी सरकार का प्लान
सरकारी बैंकों को बेचकर सरकार राजस्व कमाना चाहती है ताकि उस पैसे का उपयोग सरकारी योजनाओं पर हो सके इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार बड़े लेवल पर प्राइवेटाइजेशन करने का प्लान बना रही है। सरकार ने बजट में 2 बैंकों में हिस्सा बेचने की बात कही थी, लेकिन मोदी सरकार देश में कुछ बड़े सरकारी बैंकों को ही चलाने के पक्ष में

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