सरकारी अस्पतालों पर एंटी रैविज इंजेक्शन नहीं

  • सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है एंटी रैविज इंजेक्शन
  • मुफ्त दवाई की घोषणा हवा-हवाई

देवरिया। स्वाश्थ्य महकमा बेहतर व्यवस्था का भले दावा करे। जमीनी हकीकत कुछ अलग है। बीते वर्ष नवम्बर माह से इस वर्ष फरवरी तक सरकारी अस्पताल कुत्ते काटने पर लगाये जाने वाले एन्टी रैविज इंजेक्शन की समस्या से जूझ रहा है। न कोई जनप्रतिनिधि इस बारे में पहल कर रहा और न ही स्वाश्थ्य विभाग के जिले पर बैठने वाले बड़े अफसर ही ध्यान दे रहे। जनता परेसान है। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि लार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मात्र 5 वायल इंजेक्शन पिछले माह आया था, जो ऊंट के मुँह में जीरा साबित हुआ। औसतन प्रतिमाह अस्पताल पर 100 वायल की जरूरत होती है।
कोरोना संक्रमण काल में सरकारी अस्पतालों में तीन माह से अधिक समय से एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। इंजेक्शन न होने से मरीज अस्पताल से निराश होकर लौटने और दुकानों से महंगे इंजेक्शन लगवाने को मजबूर है। कोरोना काल में करीब दो माह तक अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से एंटी रेबीज के इंजेक्शन नहीं लग सके। इसके बाद ओपीडी चालू हुई तो एंटी रेबीज के इंजेक्शन खत्म हो गए। इंजेक्शन न होने के मरीज परेेशान हैं।सत्ता दल के नेता और जनप्रतिनिधि आये दिन सरकार के विकास कार्यों का बखान करते हैं, लेकिन जब उनसे एंटी रैविज इंजेक्शन के बारे में पूछा जाता तो वे कन्नी काट लेते है। कई समाजसेवियों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मन्त्री जय प्रताप सिंह तक सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात पहुंचाए लेकिन निराशा ही हाथ लगी।


बाजार में दुकानों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन अलग-अलग कंपनियों के 320 से लेकर 357 रुपये तक में मिलता है। कुत्ता काटने पर एक व्यक्ति को पांच इंजेक्शन लगवाने होते हैं। इस तरह से उन्हें इसका इलाज कराना काफी महंगा पड़ता है। सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन न होने से महंगे इंजेेक्शन खरीदकर लगवाना मजबूरी बनी है।
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लार के अधीक्षक डॉ बीवी सिंह ने कहा कि रैविज इंजेक्शन के लिए पत्र लिखा गया है। मरीज ही नहीं अस्पताल का स्टाफ भी इस समस्या से परेसान है।

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