देवरिया उप चुनाव में टिकट को लेकर राष्ट्रीय सचिव से बदसलूकी
एन डी देहाती, देवरिया | देवरिया सीट पर 1985 के बाद जिस कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया, उस कांग्रेस के टिकट के दावेदारी में भी बहुत मारामारी है। 10 अक्टूबर को टाऊन हाल में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के साथ जिस प्रकार की बदसलूकी हुई वह कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र को ही नहीं अनुशासन को भी उजागर किया। जिलाध्यक्ष चाहें लाख दावे करें और यह कहें-कोई ख़ास बात नहीं हुई। सोशल मीडिया के इस युग में मिनट नहीं लगते वीडियो चलने लगते है। वीडियो कल भी वायरल हुए। इस वीडियो को कोई और नहीं पार्टी के कार्यकर्ता ही वायरल कर दिया। चाल, चरित्र, चेहरा सबके सामने आ गया। जब जरूरत थी कि जनता को सरकार से उपजी नाखुशी को भुनाने की तो टिकट के दावेदार आपस में ही हंगामा खड़ा कर दिए।
उपचुनाव में टिकट कटने से नाराज महिला नेता ने शनिवार को टाउनहाल स्थित पार्टी कार्यालय पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सचिन नाइक पर गुलदस्ता चला दिया। गुलदस्ता तो स्वागत के लिए लाया जाता है, चलाने के लिए नहीं। हाथापाई व हंगामा इस कदर हुआ कि कोतवाली पुलिस भी पहुंच गई। कांग्रेस पार्टी ने देवरिया सदर विधानसभा सीट पर मुकुंद भाष्कर मणि को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सचिन नाइक, प्रदेश सचिव कौशल त्रिपाठी, कोआर्डिनेटर सुरेंद्र शर्मा के साथ पार्टी कार्यालय पर पहुंचे और पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उपचुनाव की रणनीति तय करने में जुटे थे। इसी बीच महिला नेता तारा यादव पहुंच गईं। उन्होंने राष्ट्रीय सचिव से कहा कि मैं एकमात्र महिला दावेदार थी। फिर भी मेरा टिकट काट दिया गया। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष सुयश मणि व बिस्मिल्ला लारी मुन्ना, जयदीप त्रिपाठी, भरत मणि, सुभाष राय, महेंद्र अंबेडकर, अरविद शाही, अजय सिंह, आलोक त्रिपाठी आदि की मौजूदगी में तारा यादव ने चिल्ला चिल्ला कर कहा कि दागी को टिकट दिया गया है। हमारा विरोध जारी रहेगा। उधर कांग्रेस प्रत्याशी मुकुंद भाष्कर मणि ने कहा कि मुझे फर्जी मुकदमे में फंसाया गया था।
कांग्रेस के अंदरुनी कलह के कारण जो भी हों लेकिन सोशल मीडिया, इलेक्ट्रानिक चैनल और दूसरे दिन अख़बारों में खबर को पढ़कर आम आदमी भी यह सोचने लगा है कि इस प्रकार की असहमति के नाम पर अराजकता, वरिष्ठ पदाधिकारियों का अपमान ठीक नहीं है।