राममंदिर से पहले होना हैं रामजानकी मार्ग का चौड़ीकरण

  • नितिन गडकरी ने वर्ष 2015 में रामजानकी मार्ग के लिए 2000 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की थी।

एम के निल्को, गोरखपुर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अगस्त को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन कर जैसे ही शिलान्यास किया गोरखपुर, देवरिया अंचल के लोगों की उम्मीद बढ़ गई क्योकिं शिलान्यास के साथ यह घोषणा भी कर दी गई कि प्रभु श्रीराम का मंदिर बनने से पहले राम जानकी मार्ग बनकर तैयार हो जाएगा। हालाकिं भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाने के साथ ही यह घोषणा कर दी थी कि राम से जुड़े मार्गों को बेहतर किया जाएगा। वर्ष 2015 में भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जब गोरखपुर आए थे तब उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश की सड़कों के लिए 16,000 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। इनमें प्रमुख रूप से गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन, कालेसर-जंगल कौड़िया फोरलेन शामिल है। इसके अलावा उन्होंने रामजानकी मार्ग को महामार्ग बनाने की घोषणा भी की थी।

स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्ष 1962 में चिल्लूपार के तत्कालीन विधायक कल्पनाथ सिंह ने चंद्रभानु गुप्ता मंत्रिमंडल में इस मार्ग को रामजानकी मार्ग घोषित करने की मांग की थी। तब सरकार ने अयोध्या से लेकर बिहार बॉर्डर पर गुठनी तक रामजानकी मार्ग घोषित कर दिया। बाद में सरकार ने इसे राज्यमार्ग 72 घोषित कर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी ने अपनी पुस्तक ‘जहं जहं चरण पड़े रघुवर के’ में लिखा हैं कि –

… मगर उस राह पर चलने को मन मचल उठा, जिस राह पर प्रभु राम और मां जानकी के पवित्र चरण पड़ने की किंवदंती प्रचलित है । …और एक बार जो पांव बढ़े प्रभु की राह में तो प्रभु की मौजूदगी के चिह्न तो मिलते ही गए बल्कि ऐसे भी चिह्न मिले जो इस बात के सबूत थे कि यह यकीनन ‘देवपथ’ है क्योंकि समकालीन तथ्य तो किंवदंतियों में है परंतु ऐतिहासिक, पौराणिक, स्वातंत्र्य वीरों से जुड़ी वीरगाथाओं और आध्यात्मिक घटनाओं की ऐसी श्रृंखला मिलती चली गई जो इस पथ को और महान बनाती गई और यकीन दिलाने लगी बाद के कालखंडों में इस पथ पर घटी गवाही देती घटनाएं कि यकीनन प्रभु इस राह से गुज़रे होंगे । इस ‘स्मृति-यात्रा’ में कई ऐसे तथ्य आपको मिलेंगे जो जनश्रुतियों, किंवदंतियों और परंपराओं में चली आ रही लोकगीतों-लोकगाथाओं पर आधारित हैं कई ऐसे भी तथ्य हैं जिन पर आगे भी शोध की आवश्यकता होगी । उस यात्रा से जो कुछ मिला और जैसे भी मिला उसे उसी रूप में आपके समक्ष पहुंचा रहा हूँ ।

जनश्रुति है कि अयोध्या से राजा दशरथ अपने दो पुत्रों भरत, शत्रुघ्न तथा बारातियों के साथ इसी  मार्ग से जनकपुर पहुंचे थे। विवाह सम्पन्न होने के बाद राम अपने तीनों भाइयों तथा माता जानकी सहित इसी रास्ते से अयोध्या लौटे थे। इस मार्ग के किनारे कई स्थल हैं जिसे राम से जोड़कर लोग देखते हैं।

यह भी देखें  माहौल बिगाड़ने की कोशिश, ओबीसी महासभा ने रामचरितमानस की प्रतियां जलाई

 

About Author

Leave a Reply

error: Content is protected !!