देवरिया की गंदगी से प्रभावित हो रही बन्दगी

देवरिया। दावे बड़े बड़े। धरातल का सच कुछ और बयां कर रहा। शहरों , पार्कों, स्टेशनों के नाम बदलने से स्वच्छता व सुंदरता नहीं आएगी। देवरिया के मालवीय रोड पर एक देव स्थान से सटे कूड़े का अंबार और पगुरी करतीं गाय माताएं एक साथ सरकार की दो योजनाओं की पोल खोल रही। स्वच्छता के नाम पर करोड़ों खर्च करने वाली सरकार को यह पता होना चाहिए कि हकीकत क्या है। गो आश्रयों में यदि गो वंश रखे जा रहे तो फिर इस शीत लहर में मालवीय रोड पर ये लावारिस गायें क्यों दिख रहीं।

देवरिया का मालवीय रोड अवैध पार्किंग का अड्डा तो है ही , अब कूड़ा से भी पटा है। इस तरह की गंदगी है कि बगल में ही स्थित देव् स्थान पर भयंकर बदबू के चलते बन्दगी मतलब पूजा पाठ में भी दिक्कत है। आसपास के लोग अपने घरों का कचरा मंदिर के समीप ही फेंक देते हैं। नगर पालिका कचरे के ढेर को समय से साफ भी नहीं करती। लावारिस गायें यहाँ दिन भर गोबर करती हैं। देवरिया में कचरा प्रबंधन और गो आश्रय केंद्रों की हकीकत बताने के लिए एक यह तषवीर ही काफी है। नगर पालिका, जिला प्रशासन, सांसद, विधायक कोई तो इस पर ध्यान देकर स्वच्छता के सरकारी एजेंडे को पूरा कर दिखाए।

शहर में प्रतिदिन 75 से 80 टन कूड़ा निकल रहा है। फिलहाल इसे शहर से आठ किलोमीटर दूर बेलडाड रोड किनारे एक निचली जगह पर गिराया जा रहा है।  उसरा बाजार में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना के लिए दो करोड़ 44 लाख 15040 रुपये खर्च कर 1.6870 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है।

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-देवरिया से पुरुषोत्तम सिंह की रिपोर्ट

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