बलात्कार!बलात्कार!!बलात्कार!!! ये क्या हो रहा है सरकार-डॉ अजेश कुमार पाण्डेय

प्रदेश में सख्त सरकार है। इसके बावजूद कभी न कभी बलात्कार की खबर आ जा रही है। 6 नवम्बर से 8 नवम्बर के बीच प्रदेश में आधा दर्जन बलात्कार की घटनाओं ने सोचने को विवश किया। बलात्कार क्यों?कारण और निवारण पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे डॉ अजेश कुमार पाण्डेय

भारत मे बलात्कार की वारदातें क्यो, कारण तथा सुझाव 

एक”बलात्कार अपराध” निर्भया कांड समूचे भारत को झकझोर कर रख दिया था,आज यही अपराध भारत मे एक महामारी के रूप में पैर पसारती जा रही है, ये अपराध एक अभिशाप बनकर दिनोंदिन प्रत्येक वर्ग के लोगों,सरकारोँ, राजनीतिको,,समाज सुधारकों, पुलिसकर्मियों, अधिकारियों,के लिए चुनौती बनती जा रही है।,
आज वर्तमान समय मे बलात्कार
जघन्य अपराध का एक ब्यापक आक्रोश के बिच इसकी घटनाओं का वर्णन तथा उद्देश्य पर प्रकाश डाला जाय तो समाज के एक खास वर्ग को कोसना को नकारा नही जा सकता है।क्योंकि हम उस दौर से गुजर रहे हैं कि 2g,3g,4g,5g, मोबाईल,एंड्राइड,स्मार्टफोन, व इंटरनेट के युग मे हमें सर्व सुलभता से पोर्न,पोर्न फोटोज,वीडियो, सबके पास सब आसानी से उपलब्ध हो जा रहे हैं।
ये पहले कही उच्च वर्ग में तो कही सामान्य वर्ग में ही उपलब्ध होता रहा है और आज प्रत्येक वर्ग के लोगों के पास सुलभ है।
इतना ही नही आज हमें keyboard पर लिखने तक कि आवश्यकता नही पड़ रही है।आज हम मुह से बोलकर गूगल को आदेश करते जा रहे हैं, और गूगल हमे लगभग सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता जा रहा है। ऐसे में इस परिघटना पर विचार करने के बजाय हम अपने समाज मे फैले आदिम प्रबृत्ति के लोंगों को समझने का प्रयास की जाना चाहिए।क्योंकि तकनीकी का माध्यम तो समयानुसार बदलता रहता है, किंतु हमारी प्रबृत्ति कायम रहती है।
उदाहरणार्थ में यदि सर्व सुलभ मोबाइल के माध्यम से यू ट्यूब पर रेप दृश्य,पोर्नफोटोज,वीडियो,पोर्नग्राफी, शेयर किए जा रहे औऱ आपलोड किये जा रहे है।
ऐसे में बलात्कार के समय वीडियो बनाना ही मकसद तथा ब्लैकमेलिंग ही नही वेवसाइट पर शेयर करना सामान्यतः उद्देश्य होता व बनता जा रहा है
यदि इसकी गहराई से जांच किया जाए तो अवश्य ही इसके गोरखधंधे का असलियत का पता चल सकेगा,की क्यों पोर्न वीडियो बनाने वाले को क्या कोई मोटी रकम भी मिलती है अथवा नही।
जैसे कठुआ कांड के चार युवक पोर्न वीडियो दिखाते देखते हैं और आसिफा के साथ कुकर्म करते हैं,हाथरस, कानपुर,मिर्जापुर,उन्नाव,संतकबीरनगर, झांसी, ऐसे में बलात्कार एक प्रवृत्ति बनती जा रही है जो भारतीय समाज को झकझोर देने वाली स्थिति दिल दहला देने वाली रही है।
यह जनमानस के लिए और चिंतन के लिए मजबूर करती जा रही है एक घटना निर्भया कांड जिनमे समूचा भारत ही नही पूरा विश्व एक स्वर में बोल रहा था ब्लात्कार जघन्य अपराध है।जब कि वर्तमान में रोज एक न एक निर्भया बनती जा रही है।
एक प्रकार की मानसिकता बनती जा रही है, हम सबमे कुछ का दिमाग पुरानी रीति रिवाजों, आदतों से घुला मिला है।हमारा समाज जिम्मेदार है जो कही कही स्त्री को भोग का विषय वस्तु समझता मानता रहा है।निर्भया कांड में हमारा भारतीय संसद सदमें में जी रहा था,शक्तिशाली महिलाएं चुपी धारण की बैठी रही, जब की उनके पास सत्ता की ताकत रही, और क़ानून बनाने से क्रियान्वयन,क्रियान्वित करने की क्षमता में कोई कमी नही रह।लेकिन उनके आंख में सिर्फ आँसू बह रहा,और करुणा से भरा मार्मिक भाषण । अपराध पर त्वरित कार्यवाई करने,करवाने के बजाय सिर्फ संवेदनशील भाषण व आँसू बहा रहे थे।औए आज भी यही हो रहा है।कहा और माना जाता रहा है कि संसद सदमे में है।
कुछ ही समय के बाद फ़िल्म अभिनेत्री रेखा जी संसद मनोनीत होने के बाद अपनी सादगी की लोहा मनवाने वाली सांसद भवन में प्रवेश कर ही रही थी,उस वक्त का फोटो वायरल होता है, जिनमे कई माननीयों के कातर नजरों की पाखी नजरों ने भूरी भूरी भर्त्सना हुई। जिसका किसी को अंदाजा नही हो सकता होगा।

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हमारे समाज मे महिलाएं अपने हमेशा असुरक्षित महसूस करती है,इनको कुछ बुधुजीवियो द्वारा सिर्फ भोग की बस्तु ही समझा जाता रहा है। यदि समाज मे लज्जा, व डर न हो तो समाज का हर चौथा,पांचवा ब्यक्ति होता।
यदि सेक्सुअली डिजायर होने पर उसे मास्टर वेट आदि के द्वारा पूरा कर लिया जाए तो रेप तक कि बात नही पहुँचेगी ।जो पोर्न ,कपड़े,या अन्य माध्यम हो सकता है।

मौका मिलने पर यदि पकड़े जाने का डर न हो तो ब्यक्ति रेप करने से डर नही करेगा।इसके कई कारण है…एक तो समाज मे अपनी शक्ति,क्षमता,सामर्थ्य,तथा पहचान क्रिएट करना भी माध्यम बनता जा रहा है।

अगर कोई महिला (लड़की)पसन्द आ जाती है उसे हर हाल में पानें व मिलने की उम्मीदें पालना चाहे वो सहमत हो या नहो…वहाँ उसका अहंम ही उसका वजह बनता जा रहा है, अमूक ब्यक्ति अपने काम वासना पर नियंत्रण करना नही चाहते…ऐसे लोगो के लिए बलात्कार (रेप) ही बदला लेने का माध्यम बन जाता है। कही कही तो लोगों में बहुत बड़ी विकृति उत्पन्न हो जाती है,लड़का लड़की में भेद करते ,तो कही बराबरी कराए जाने पर दोनो की स्वतंत्रता में लड़की की मर्जी के खिलाफ कुछ अनहोनी न होने की बातें कही जाती रही है,बल्कि कही… कभी..उसके विपरीत परिस्थितियां उत्तपन्न होती जा रही है। जिनमे उनका ही कोई फेवरेस्ट,दोस्त,व हीरो ही उस लड़की के साथ जोर जबरजस्ती करता है जो एक प्रकार का बलात्कार का बढ़ावा मिल रहा है।

जहाँ तक मेरा विचार है कि पुरुषों में अपने प्रति श्रेठता की भावना,अथवा समाज पर अधिपत्य, प्रभुत्व,वर्चस्व,एकाधिकार,और महिलाओं के प्रति सामाजिक विकेंद्रीकरण,खास तौर पर युवाओं में महिलाओं के प्रति सहानुभुति का घोर अभाव,इसका सबसे बड़ा उदाहरण बलात्कार पर भारतीय संसद में कठोर कानून का तथा बलात्कार बीमा योजना का पक्ष विपक्ष दिनों ने मिलकर पुरजोर विरोध किया गया जिससे न कठोर कानून बना,न बीमा बिल पास हो सकी।

आज हमारे भारत की तश्वीर ऐसे नही रहती की डिजिटल इंडिया में यू ट्यूब,गूगल, यह हमारी युवाओं के काल्पनिक यौन इच्छा को संतुस्ट करने का साधन बनता जा रहा है। आप अंग्रेजी में रेप सिन टाइप करें तो इसका परिणाम50 लाख,60,80 लाख देंखने वाले प्रतीत होंगे। यानी इसको देखने वाले कि संख्या कम नही है।इस प्रकार हमें यह प्रमाण मिलता है कि यू ट्यूब की तरह सेक्स ट्यूब, रेप्टयूब,एक प्रकार का समानांतर एप बनता,व दिखता नजर आ रहा है।जिनमें बलात्कार पोर्न फोटोज,वीडियो, धड़ल्ले से डाले जा रहे हैं।
सबसे पहले पोर्न वीडियो को बढ़ावा देने वाले 2006 में एक वीडियो गेम आयी जिनका नाम “रेपलें”है।जिनमे एक लड़का एक माँ व उसके दो पुत्रियों के साथ अलग अलग ढंग,व तरिके से बलात्कार करता है। आश्चर्य की बात तो तब होता है कि वह वीडियो अमेजन डाटकाम 2009 तक बेची और खरीदी जाती रही,फिर बाद में विरोध के बाद उस पर प्रतिबंध किया गया। ऐसे में बलात्कार जैसी हिंसा हमारी यौनिकता से प्रेरित है इसे हम “मिशन शक्ति” को मूर्त रूप देने के लिए सर्वप्रथम हमें मनोबैज्ञानिक स्तर पर सोचने की जरूरत है।यौनइच्छा, यौनसंपर्क,प्रजनन प्रक्रिया को बैज्ञानिक तरीके से समझने की आवश्यकता है।तथा इसकी रहस्यात्मकता,कौतूहलता से जुड़ी आक्रामकता का दमन,समन हो सकेगा।

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ब्यक्ति के यौन संबंधी ग्रन्थियां,हार्मोन्स किस प्रकार काम करते हैं एक्शन हाइपोथीसिस के तहत समझने,समझाने की आवश्यकता है।इसे किन किन सीमा तक को छूने या पार करने के बाद यह मनोरोग की श्रेणी में आएगा,इसका एक योजना,रूपरेखा तैयार कर मिशन शक्ति के साथ जोड़ा जाएं जिनसे हमें लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
हम यह आसानी सोच सकते हैं कि

करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान।।

ठीक इसी प्रकार चाहे जैसे भी हो हम पर प्रभाव डालता ही है निशान बन ही जाता है लगातार अभ्यास से मन,कर्म,वचन के रूप में।
प्राचीन मनीषियों ने दैहिक, आध्यात्मिक साधना से अनुभूत प्रमाणित होता है।आज हमारे शिक्षा मनोबैज्ञानिको ने अपने शोधकाल मे पाया है कि हमारे दिमाग की बनावट ही ऐसी है कि बार बार,पढ़ने,सुनने,देखने,जानने वाले कार्यों का असर हमारी चिंतन सकती पर पड़ती है।
इस लिए पोर्नग्राफी, पोर्नफोटोज,पोर्न वीडियोज,ये सभी डिजिटल इंडिया में परोसे जाने वाले साफ्टपोर्न का असर हमारे दिलोदिमाग पर पड़ता है।और यही हमे मानसिक तौर पर बलात्कार के लिए तैयार और प्रेरित करता है।

इस लिए इनमें अभिव्यक्ति की रचनात्मकता की नैसर्गिक स्वतंत्रता की आड़ में तमाम तरह के फुहड़, हिंदी,भोजपुरी, बंगाली,पंजाबी,गीत गाने,आइटम सॉन्ग हमारे अलग अलग भारतीय भाषाओं में बेधड़क ,बेहिचक प्रसारित,परोसे जा रहे हैं।जिनमे साफ साफ स्त्रियों के विरुद्ध उनके अस्मिता के विरुद्ध यौन हिंसा को उकसाने वाले गीत,गाना,वीडियो,जिसमे महिलाओं को वस्तुकरण करने वाले गानों का विरोध करना तथा उसकी वकालत करने वाले का विरोध करना अति अवश्य ही है।यह कार्य हम मिशन शक्ति के माध्यम से बहुत सरलतापूर्वक कर सकते हैं।

रॉबिन मॉर्गन पोर्नग्राफी एंड रेप में प्रत्येक समाज का आगाह करते हुए कहा है कि पोर्नग्राफी हमे उस सिद्धान्त की तरह करता है कि जो ब्यवहारिक तौर पर बलात्कार को अंजाम दिया जाता है।जिनमें लगभग 80%मामला पोर्नग्राफी ही है। ऐसे में भारत के सभी राज्यों को पोर्न साहित्य सिनेमा,फोटोज वीडियो पर पूरी तरह बेन सेंसर लगा देनी चाहिए। जो वर्तमान स्थिति को देखकर वास्तविक यही समाधान प्रतीत हो रहा है।जो सभ्यता मूलक चुनौती है।

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यह पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन के मानवीय मूल्यों का समावेश का उपक्रम है।जिनमे एकता,ममता,समता,सुचिता,अहिंसा, करुणा,सहानुभुति, मनुष्य मात्र के गरिमा के प्रति के प्रति सम्मान की भावना भरने वाले प्रबोधनात्मक सामाजिक परियोजनाओ को त्वरित विकसित करने की आवश्यकता है।जिससे पोर्न अस्वादु,अपच इन प्रचलित परिघटना को अप्रसांगिक और अनुपयोगी कर देने की महती जरूरत है।इस जरुस्त को जड़ से जुदा करने में बाधा पहुचाने वाले भी वही है जो कही न कही से बलात्कार शब्द की पीड़ा से पीड़ित भी है।जिनमे हाई प्रोफाइल की सख्सियत कही से अछूते नही है।महन्थ,सन्त बाबा,पुलिस, वकील,जज,शिक्षक,पत्रकार,डॉक्टर, इंजीनियर, नेता, मंत्री,अभिनेता,तक ये सभी भी यौन हिंसा आरोपी सज़ायाफ्ता यह रहे हैं।यह किसी खास आय,वर्ग,जाती,आयु,पेशा,क्षेत्र, तक सीमित नही है, इस लिए इसे सभ्यता मूलक मानना ही अच्छा होगा।

पोर्नपर कुछ प्रबुद्ध लोगो का विचार है कि यह सिर्फ मनोरंजन का साधन मात्र है।उनका विचार है कि समाज मे ऐसे भी है जो इसे देखकर संतुस्ट हो जाने वाले हैं।वह किसी प्रकार की हिंसा को अंजाम नही देते हैं।साथ साथ कुछ ऐसे भी है किताबो में ब्यस्त हो अध्यात्म का योग का सहारा लेकर खुशहाल है। जब कि आज यथास्थिति देखते हुए बलात्कार का एक मात्र कारण अशिक्षित समाज मे सर्वसुलभ पोर्न ही है,इसका एक मात्र जबरजस्त उदाहरण आप पेपर और टीबी के माध्यम से सुन रहे होंगे कि एक दलित बेटी के साथ बलात्कार हुआ ,उसकी अपरिपक्वता के कारण कुछ आदिम प्रबृत्ति के इंसान जी जानवर के रूप मे कुकृत्य अंजाम देते हैं।

जबकि सामान्य तौर पर हम सब किसी को जाहिल,गवार, कुकर्मी,आदिम नही कह सकते किंतु यह व्यक्ति की मनोदशा पर संस्कार,सभ्यता,संस्कृति, से सुसज्जित होने उनमें नैतिक मर्यादाओं की मौजूदगी ही उन्हें सभ्य असभ्य की संज्ञा देने की प्रथा की मान्यता दी जाती रही है।

इस प्रकार बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए मिशनशक्ति को मनोबैज्ञानिक तौर तरीकों का ज्ञान होना सूझबूझ,समझदारीपूर्ण फैसला लेने की आवश्यकता है,महिलाओं के कपड़े की माप, लेने से बेहतर ब्यक्ति अपनी बीमार मानसिकता को बदलें उनमें मौजूद विकार,विकृतियों को दूर करने के प्रयास को प्रचार प्रसार करना नैतिक जिम्मेदारी बनती है

अक्षम्य अपराध को रोकने के लिए शुरू में माता पिता को बच्चों के साथ बैठकर नैतिक,अनैतिक, सभ्य,असभ्य,सत्य असत्य, का ज्ञान कराना नैतिक जिम्मेदारी बनती है।

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