देवरिया सदर – ब्राह्मणों का किस पार्टी को मिलेगा साथ?

  • वोट किसी को भी…जितेगा इस बार ‘त्रिपाठी’ ही
  • देवरिया के इतिहास में पहली बार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण उम्मीदवारों पर लगाया है दांव
  • देवरिया सदर सीट पर 29 साल से नहीं चुना गया है कोई ब्राह्मण कैंडिडेट

वोट किसी को भी…जितेगा इस बार ‘त्रिपाठी’ ही… यूपी के देवरिया सदर उपचुनाव में इस बार स्थिति कुछ ऐसी ही है। इस बार यहां त्रिपाठी बनाम त्रिपाठी की जंग देखने को मिलेगी। देवरिया के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब उपचुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया है। इसमें भी खास बात यह है कि सभी प्रत्याशियों का उपनाम ‘त्रिपाठी’ ही है।
यूपी में जातीय राजनीति का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। सत्ता की चाभी इस समय ठाकुर नेता सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथ में है। ऐसे में विपक्ष उनके ऊपर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाता ही रहा है। पिछले दिनों कुख्यात विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद इसकी चर्चा तेज हुई थी। शायद यही वजह है कि इस बार उपचुनाव में खासकर देवरिया में कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी, बीएसपी और यहां तक कि बीजेपी ने भी ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा है।

ऐसे में देवरिया सदर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का मतदान 3 नवंबर को होना है। जानकार मानते हैं कि यूपी की 7 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में देवरिया सदर सीट इकलौती ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। ऐसे में यह सीट ही तय करेगी कि भविष्य में ब्राह्मण किस पार्टी के साथ होंगे।  भाजपा से जहां डॉ सत्य मणि त्रिपाठी को टिकट दिया गया है तो वहीं सपा से पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी को टिकट मिला है। कांग्रेस ने मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी को अपना कैंडिडेट बनाया है। जबकि बसपा ने अभयनाथ त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

देवरिया सीट पर हो रहे उपचुनाव में 29 साल बाद कोई ब्राह्मण उम्मीदवार विधायक बनेगा। 1989 में ब्राह्मण उम्मीदवार राम छबीला मिश्रा जनता दल से चुनाव जीते थे, जिसके बाद से अभी तक कोई भी ब्राह्मण इस सीट से चुनाव नहीं जीत सका है। 29 साल बाद चार ब्राह्मण उम्मीदवार आमने-सामने देवरिया के उपचुनाव में आमने सामने हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 29 साल का रिकॉर्ड कौन उम्मीदवार अपने नाम करता है। देवरिया सीट के बारे में यह भी जानना जरूरी है कि 2009 से पहले यह सीट गौरी बाजार विधानसभा के नाम से जानी जाती थी। 2012 में इस सीट पर पहला चुनाव हुआ। जिस पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया था।

 

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