सिर्फ शराब और गुटका बेचने से नहीं भरेगा सरकारी खजाना
कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन 3.0 लागू होते ही सोमवार को देशभर में शराब की दुकानें खुल गई। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उड़ाई गईं धज्जियां। कुछ लोगो द्वारा शराब की दुकाने खोलने के पीछे राजस्व की कमी का तर्क दिया जा रहा है । वहीं शराब की बिक्री से खजाने में खनक लाने वाले तर्क पर बीजपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सवाल खड़े कर किए हैं। अश्विनी ने नशे के कारोबार से शासकीय कोष भरने वाले लॉजिक को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होने सरकारी खजाने को भरने के लिए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात कही।
अश्विनी उपाध्याय ने अपने ट्वीट पर लिखा, “बीड़ी सिगरेट गुटका शराब बेचने से न खजाना भरा था, न भरेगा नशा कारोबार से गरीबी, बेरोजगारी, चोरी, लूट, झपटमारी, सूदखोरी, सड़क दुर्घटना, शारीरिक, मानसिक बीमारियां और महिलाओं पर हिंसा बढ़ती हैं. बलात्कार व्याभिचार जूआ और माता-पिता पर अत्याचार बढ़ता है खजाना भरना है तो भ्रष्टाचार बंद करें”।
80% भ्रष्टाचार एक साल में समाप्त हो जाएगा
100₹ से बड़े नोट और 5,000 से महंगे सामान का कैश लेनदेन बंद करें
50,000 से अधिक लेनदेन पर आधार अनिवार्य करें
कालाधन, बेनामी और आय से अधिक संपत्ति 100% जब्त करने और भ्रष्टाचारियों को आजीवन कारावास देने के लिए कानून बनाएं@narendramodi
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniBJP) May 5, 2020