Special Report – What is Citizenship Amendment Bill ?

जम्मू-कश्मीर से 370 को समाप्त किए जाने तथा उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद मोदी सरकार को संसद में दूसरी बड़ी कामयाबी मिली जब उसने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को दोनों सदनों से पारित करा लिया । राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब ये क़ानून बन चुका है । लेकिन पूरे देशभर में Citizenship Amendment Bill के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वैसे तो नागरिकता संशोधन क़ानून का असर पूरे देश में होना है लेकिन इसका विरोध पूर्वोत्तर राज्यों, असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ज़्यादा हुआ और जब छात्रों ने इसका विरोध शुरू किया है, तो इसकी आंच देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों तक पहुँच गई ।

अब सब लोग जानना चाहते है कि आख़िर इस क़ानून में ऐसा क्या है, जिससे विवाद इतना बढ़ गया है । Citizenship Amendment Bill  के मुताबिक़ पड़ोसी देशों से शरण के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है । सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किया गया था उसमें दो अहम चीज़ें थीं – पहला, ग़ैर-मुसलमान प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देना और दूसरा, अवैध विदेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान हैं ।

गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को सदन को बताया था कि उनकी सरकार दो अलग-अलग नागरिकता संबंधित पहलुओं को लागू करने जा रही है, एक CAA और दूसरा पूरे देश में नागरिकों की गिनती जिसे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर या NRC के नाम से जाना जाता है । अमित शाह ने कहा था कि CAA में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है ।

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उन्होंने बताया था कि एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी ।

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