किसानों की शत्रु नीलगाय चट कर रहीं फसल

देवरिया। अन्नदाता माथा पिट रहा। उसकी गाढ़ी कमाई नीलगाये चट कर रहीं। न सरकार को चिंता है न जिला प्रशासन को। वन व कृषि विभाग तो वैसे ही किसी कार्य में बहुत रूचि नहीं लेते। जिले के लार ब्लॉक के दर्जनों गावों में सैकड़ो की संख्या में नीलगाये अन्नदाता की कमर तोड़ रहे हैं। बचाव के सारे इंतजाम फेल हो गए हैं। अब टिन पीटने और पटाखा फोड़ने से भी नीलगाये नहीं भाग रहीं। हाँका लगाने पर एक खेत से निकल कर दूसरे खेत में चली जा रहीं। सब्जियों की खेती चौपट करने के बाद अब मटर व गेहूं की फसलों को अपना निशाना बना रहीं हैं। लार विकास खण्ड के हरखौली, संजाव, खरकतुला, कुंडावल तारा, बढ़नपुरा, तिलौली, रेवली, भेवली, जनुआ, पलिया, सरकड़ा में इन नीलगायों का आतंक है। जिन किसानो ने गेंहू की अगैती खेती की वे पछता रहे हैं। कारण कि गेहूं की डिभी नीलगाये चरने के अलावा खेतों में जो धमा चौकड़ी कर रहे उनसे पूरी फसल रौंद जा रही। इनकी प्रजनन क्षमता भी बेजोड़ है। पहले कुछ खास वर्ग के लोग इन्हें मारकर इनके मांस खाते थे तो इनकी तादात नहीं बढ़ती थी। जबसे एक संगठन के लोग नीलगायों के मारने पर बवाल व बखेड़ा करना शुरू किये तबसे इनकी संख्या भी कई गुना बढ़ गयी। किसानो की रहनुमाई की बातें चाहें कोई करे हकीकत यह है कि नीलगायों के मामले में प्रशासन कुछ नहीं करा रहा। न उनकी नशबंदी हो रही। न उन्हें मरवाया जा रहा। हालात बड़े बदतर हो गए हैं। किसान दाने दाने को मोहताज़ हो जाएंगे।

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