पक्षियों के मौत का समंदर बना सांभर झील
- राजस्थान की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी
- सरकारी आकड़ों के अनुसार अब तक 15000 से ज्यादा पक्षियों की मौत, जिम्मेदार खामोश
- मौत का खुलासा अब तक नहीं
- बचाने की जगह जख्मों पर नमक लगा रहा प्रशासन
- जेसीबी से खोदकर दफनाया जा रहा पक्षियों को
ये तस्वीरें विचलित करती हैं। अगर ऐसा ही कुछ इंसानों को साथ हुआ होता, तो अब तक दुनिया हिल चुकी होती। तमाम सामाजिक संगठन सक्रिय हो जाते। लेकिन ये तो मूक परिंदे हैं। इसलिए हजारों परिंदों की मौत के बावजूद बहुत ज्यादा हलचल नहीं हुई। यह दृश्य दुनिया भर से पक्षियों के प्रवास के लिए जानी जाने वाली जयपुर की सांभर झील का है। जयपुर की विश्व प्रसिद्ध सांभर झील की खूबसूरती पर हजारों परिंदों की मौत ने कलंक लगा दिया है। यहां कुछ ही दिनों के अंदर सरकारी आकड़ों के अनुसार 15000 से ज्यादा प्रवासी परिंदों की मौत हुई है जबकि वास्तविकता कुछ और ज्यादा ही है । झील पर परिंदों की लाशें यूं पट गई थीं कि दूर से देखने पानी तक नजर नहीं आ रहा था। परिंदों की मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन एक बात साफ है, इन परिंदों की मौत स्वाभाविक नहीं है। बल्कि किसी न किसी की लापरवाही से जुड़ा हुआ है। इन पक्षियों की मौत से स्थानीय प्रशासन और लोग हैरान हैं ।
प्रदेश की राजधानी जयपुर से पहुंचे सरकारी अधिकारियों की मानें तो पक्षियों का विसेरा जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पक्षियों की मौत के कारण का खुलासा हो पाएगा किन्तु आएगा कब ये पता नहीं ? स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने ऐसा नजारा आजतक कभी नहीं देखा । एक्सपर्ट ने बताया कि मरने वाले पक्षियों में हिमालय, साइबेरिया, नॉर्थ एशिया समेत कई देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं । ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि झील में किसी तरह कोई जहरीला केमिकल मिलाया गया या फिर झील में कोई ऐसी चीज पहुंची है, जो बेजुबान पक्षियों की जान ले रही है।
पक्षियों की मौत की जांच करने गई टीम के सदस्य अशोक राव ने कहा कि मामला बर्ड फ्लू का नहीं लग रहा है । हमें हमारी प्राथमिक जांच में ऐसा लग रहा है कि पानी में कोई जहरीली चीज मिल गई है जिसकी वजह से पक्षियों की मौत हुई है । आपको बता दें सांभर झील राजस्थान में जयपुर के समीप स्थित है। यह खारे पानी की झील है। यह देश की सबसे बडी खारे पानी की झील और नमक का सबसे बड़ा स्रोत होने के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यन्त आकर्षक स्थल है। इस झील से नमक उत्पादन के लिए ‘साम्भर नामक परियोजना’ भी चलाई जा रही है। सांभर झील समुद्र तल से 1,200 फुट की ऊँचाई पर स्थित है । जब यह झील भरी रहती है, तब इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील रहता है। सांभर झील में तीन नदियाँ आकर गिरती हैं। झील से बड़े पैमाने पर नमक का उत्पादन किया जाता है।
रिपोर्ट – डॉ एम के पाण्डेय निल्को