देवरिया कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते अधिवक्ता, हाथों में ज्ञापन और नारेबाजी का दृश्य, प्रतीकात्मक फोटो।
देवरिया। जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक और न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए बड़ा फैसला लिया है। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी, एसडीएम सदर और अतिरिक्त एसडीएम के न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब तक उठाई गई समस्याओं का समाधान नहीं होता, संबंधित न्यायालयों में न्यायिक कार्य से दूरी बनाई जाएगी।
बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन की आमसभा की बैठक अध्यक्ष ज्ञानेश्वर मिश्र की अध्यक्षता में हुई। बैठक में अधिवक्ताओं से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई। चर्चा के बाद सात बिंदुओं को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया।
अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक स्तर पर कई मुद्दे उठाए। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में पक्षकारों को पर्याप्त अवसर दिए बिना आदेश किए जा रहे हैं। अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं बताया और व्यवस्था में सुधार की मांग की।
शौचालय और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा
कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। अधिवक्ताओं का कहना है कि परिसर में पर्याप्त शौचालय की व्यवस्था नहीं है। महिला अधिवक्ताओं और महिला वादकारियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
अधिवक्ताओं के अनुसार पुरुष शौचालय के निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराया गया है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने संबंधित विभाग से निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की।
इसके अलावा कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित जर्जर पोस्ट ऑफिस भवन को लेकर भी चिंता जताई गई। अधिवक्ताओं ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर समस्या बताते हुए भवन को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की।
पेशकार के व्यवहार पर भी नाराजगी
बैठक में एक पेशकार के कथित अमर्यादित व्यवहार का मुद्दा भी उठाया गया। अधिवक्ताओं ने संबंधित कर्मचारी के स्थानांतरण की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण भी समस्या पैदा हो रही है।
अधिवक्ताओं ने एसडीएम सदर और अतिरिक्त एसडीएम न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पर्याप्त साक्ष्य के बिना आदेश किए जा रहे हैं और एक ही प्रार्थनापत्र पर दोबारा सुनवाई की स्थिति भी सामने आती है।
मांग पूरी होने तक बहिष्कार
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी समस्याओं का समाधान होने तक बहिष्कार जारी रहेगा। इससे प्रशासनिक न्यायालयों में आने वाले वादकारियों के कामकाज पर भी असर पड़ने की संभावना है।
अब देखना होगा कि अधिवक्ताओं के फैसले के बाद जिला प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द बातचीत होती है तो विवाद का समाधान निकल सकता है, लेकिन फिलहाल अधिवक्ता अपने निर्णय पर कायम हैं।
यह मामला अब सिर्फ अधिवक्ताओं की सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े न्यायिक कार्य और आम वादकारियों की सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच जल्द संवाद इस विवाद के समाधान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।