लेखपाल आंदोलन से ग्रामीणों की बढ़ सकती है परेशानी, प्रमाणपत्र और फार्मर रजिस्ट्री पर पड़ेगा असर

लेखपाल आंदोलन से ग्रामीणों की बढ़ सकती है परेशानी, प्रमाणपत्र और फार्मर रजिस्ट्री पर पड़ेगा असर

लेखपालों के प्रस्तावित आंदोलन के बीच राजस्व से जुड़े कामों को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है

लेखपालों के प्रस्तावित आंदोलन के बीच राजस्व से जुड़े कामों को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है

लेखपाल आंदोलन से ग्रामीणों के प्रमाणपत्र और फार्मर रजिस्ट्री पर असर की आशंका
लेखपाल आंदोलन से ग्रामीणों के प्रमाणपत्र और फार्मर रजिस्ट्री पर असर की आशंका

देवरिया। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आंदोलन का असर अब गांवों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की राजस्व सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। देवरिया में लेखपाल पहले ही अतिरिक्त हल्कों का काम छोड़कर संबंधित अभिलेख जमा कर चुके हैं। अब आंदोलन के अगले चरण में 8 अक्टूबर से आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, वरासत और फार्मर रजिस्ट्री समेत कई ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की गई है। ऐसे में प्रमाणपत्र बनवाने और राजस्व संबंधी काम कराने वाले ग्रामीणों को इंतजार करना पड़ सकता है।

लेखपाल संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 3 अक्टूबर को संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद 8 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों के बहिष्कार की बात कही गई है। संघ की मांगों में वेतन विसंगति दूर करने, अंतरमंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति सूची जारी करने सहित कई मांगें शामिल हैं।

आय-जाति और निवास प्रमाणपत्र पर असर

ग्रामीण क्षेत्रों में आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र का इस्तेमाल छात्रवृत्ति, प्रवेश, सरकारी योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में होता है। इन प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में लेखपाल की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार लंबा चलता है तो नए आवेदनों के सत्यापन और रिपोर्ट की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। देवरिया में अतिरिक्त हल्कों का काम छोड़े जाने के बाद प्रमाणपत्र संबंधी आवेदन लंबित होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।

किसानों की फार्मर रजिस्ट्री भी प्रभावित होने की आशंका

आंदोलन का असर किसानों के काम पर भी पड़ सकता है। लेखपालों के आंदोलन कार्यक्रम में फार्मर रजिस्ट्री और सत्यापन कार्यों का बहिष्कार शामिल है। देवरिया में पहले से ही बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर आईडी आधार और खतौनी में नाम की गड़बड़ी तथा अंश निर्धारण जैसी समस्याओं के कारण लंबित बताई गई है। ऐसे में सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित होने पर किसानों को अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है।

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वरासत और जमीन संबंधी काम भी महत्वपूर्ण

लेखपालों के काम में वरासत रिपोर्ट, भूमि संबंधी जांच, नाप-जोख और अन्य राजस्व रिपोर्ट भी शामिल हैं। अतिरिक्त हल्कों का काम छोड़े जाने से कई जगह इन सेवाओं पर असर पड़ने की रिपोर्ट सामने आई है। इससे जमीन से जुड़े मामलों में रिपोर्ट और सत्यापन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

3 अक्टूबर से आंदोलन का अगला चरण

देवरिया में लेखपालों ने 3 अक्टूबर को संपूर्ण समाधान दिवस के बहिष्कार का कार्यक्रम तय किया है। इसके बाद 8 अक्टूबर से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की गई है। आंदोलन आगे बढ़ने की स्थिति में 17 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार और 24 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम भी बताया गया है।

ग्रामीणों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आंदोलन कितने समय तक चलता है और प्रशासन लंबित कार्यों के निस्तारण के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करता है। प्रमाणपत्र, वरासत और फार्मर रजिस्ट्री जैसे काम सीधे ग्रामीणों की जरूरतों से जुड़े हैं, इसलिए इन सेवाओं में देरी होने पर सबसे ज्यादा परेशानी गांवों के लोगों को उठानी पड़ सकती है।

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