सेना के रणबांकुरे से संसद तक… देवरिया के गौरव जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी नहीं रहे
1971 के भारत-पाक युद्ध में निभाई थी भूमिका, दो बार देवरिया से बने सांसद; बेटे शशांक मणि त्रिपाठी ने दी निधन की जानकारी
देवरिया। देवरिया की राजनीति और भारतीय सेना के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम रविवार को हमेशा के लिए खामोश हो गया। पूर्व सांसद एवं भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का रविवार सुबह 11:15 बजे दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही देवरिया सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

उनके निधन की खबर उनके पुत्र और देवरिया के वर्तमान भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से साझा की। सूचना सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बरपार गांव से सेना के शीर्ष पद तक का सफर
लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का जन्म 30 जून 1935 को देवरिया जिले के बैतालपुर विकासखंड स्थित बरपार गांव में हुआ था। उन्होंने जून 1955 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। अपनी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने सेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे।
वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, जिसे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नाम से भी जाना जाता है, में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। सैन्य करियर में आगे बढ़ते हुए उन्होंने वर्ष 1992 से 1993 तक उप-सेनाध्यक्ष (डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) का महत्वपूर्ण दायित्व संभाला।
सैन्य सेवाओं के लिए मिले देश के प्रतिष्ठित सम्मान
देश की सुरक्षा और सेना में उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1986 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) तथा वर्ष 1992 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके लंबे सैन्य जीवन और उत्कृष्ट सेवाओं की पहचान रहे।
सेना से संसद तक बनाई अलग पहचान
सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। वर्ष 1996 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर देवरिया लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर संसद पहुंचे। इसके बाद वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने सफलता हासिल की और दूसरी बार सांसद बने।
उन्हें देवरिया से भारतीय जनता पार्टी का पहला सांसद बनने का गौरव प्राप्त था। इस तरह उन्होंने सेना और संसदीय राजनीति, दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
उनके पुत्र शशांक मणि त्रिपाठी वर्तमान में देवरिया से भाजपा के सांसद हैं। श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के निधन को जिले के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बरपार गांव से निकलकर देश की सेना के शीर्ष पदों तक पहुंचने और फिर संसद में देवरिया का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
