बरहज क्षेत्र में बढ़ते सरयू नदी के जलस्तर का दृश्य।
बरहज में रामजानकी मार्ग की पटरी पर हुआ अंतिम संस्कार, मईल क्षेत्र की आबादी में घुसा बाढ़ का पानी
देवरिया। जिले में सरयू और गोर्रा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। बरहज क्षेत्र में बाढ़ का असर अब जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। सरयू नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर 68.05 मीटर पर पहुंच गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण श्मशान घाट भी पानी में डूब गया, जिसके बाद लोगों को रामजानकी मार्ग की पटरी पर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होने से तटवर्ती गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है। लोगों को आवागमन, पशुओं के चारे और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
116 गांवों पर बाढ़ का खतरा
उधर, गोर्रा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी के लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए करीब 116 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की निगाहें लगातार नदी के जलस्तर पर टिकी हुई हैं।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर प्रभावित इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
मईल क्षेत्र में आबादी तक पहुंचा पानी
मईल क्षेत्र में भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। कई गांवों के हिस्सों में पानी पहुंच गया है। बाढ़ का पानी मईल के नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में भी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
पानी आबादी की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आसपास के और इलाकों में भी पानी घुस सकता है।
सड़क किनारे अंतिम संस्कार ने खींचा ध्यान
बरहज में श्मशान घाट के डूबने के बाद रामजानकी मार्ग की पटरी पर अंतिम संस्कार किए जाने की तस्वीर बाढ़ की गंभीर स्थिति को बयां कर रही है। सामान्य दिनों में जहां लोग श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करते थे, वहीं अब बाढ़ के पानी ने वह जगह भी छीन ली है।
लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को अब प्रशासन से राहत और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की उम्मीद है।