अजमेर दरगाह में खादिमों के लिए लाइसेंस व्यवस्था पर भड़का विवाद: ‘दरगाह किसी के बाप की नहीं’, चिश्ती ने दी चेतावनी | The NewsWala

अजमेर, 2 दिसंबर 2025 | The NewsWala – राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में खादिमों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने की दरगाह कमेटी की योजना ने तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। कमेटी ने 15 जनवरी से लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का विज्ञापन जारी किया था, जिसे खादिम समुदाय ने अपनी परंपरागत भूमिका पर हमला बताया है।

दरगाह कमेटी के नाजिम मोहम्मद बिलाल खान का कहना है कि यह कदम जियारत के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और खादिमों की संख्या नियंत्रित करने के लिए उठाया जा रहा है। उनका दावा है कि लाइसेंस से जाली खादिमों पर अंकुश लगेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा। कमेटी ने सभी मौजूदा खादिमों से निर्धारित फॉर्म भरकर आवेदन करने को कहा है।

वहीं, अंजुमन सैयद जादगान कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह प्रक्रिया लागू हुई तो 10 हजार से अधिक खादिम दरगाह को ‘भर’ देंगे। चिश्ती ने कहा, “दरगाह किसी के बाप की जागीर नहीं है। यह इस्लामिक संस्था है और खादिम इसके वंशानुगत संरक्षक हैं। 800 साल से चली आ रही परंपरा को लाइसेंस के नाम पर खत्म नहीं किया जा सकता।”

खादिम समुदाय का तर्क है कि वे दरगाह की धार्मिक रस्में संपन्न कराने, चादर चढ़ाने और दुआ पढ़ाने जैसे कार्य सदियों से कर रहे हैं। लाइसेंस प्रक्रिया को वे अपमानजनक और अपनी आजादी पर अंकुश मानते हैं। उनका कहना है कि कमेटी ने कभी मेंटेनेंस रजिस्टर या नियमों की समीक्षा नहीं की, फिर अचानक लाइसेंस क्यों?

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यह विवाद उस समय और गहरा गया है जब दरगाह परिसर में मंदिर होने का दावा करने वाला मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा है। खादिम पहले से ही सतर्क हैं और इसे प्रबंधन समिति की साजिश बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर #AjmerDargahLicense और #KhadimRights ट्रेंड कर रहे हैं, जहां यूजर्स खादिमों के पक्ष में पोस्ट कर रहे हैं।

दरगाह कमेटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सभी हितधारकों से सलाह ली जाएगी। हालांकि, खादिमों ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लंबे समय से चली आ रही कमेटी और खादिमों के बीच खींचतान का नया अध्याय है, जिसका समाधान बातचीत से ही संभव है।

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