PMO का नाम अब होगा ‘सेवा तीर्थ’, देशभर के राजभवन कहलाएंगे ‘लोकभवन’

केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीकों को समाप्त करने और भारतीय मूल्यों को प्रशासन के केंद्र में लाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एक बड़े निर्णय के तहत, अब देश के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ किया जाएगा। इसके साथ ही, देशभर के राज्यों में स्थित ‘राजभवन’ अब ‘लोकभवन’ के नाम से जाने जाएंगे।

इस अभूतपूर्व नाम परिवर्तन के पीछे का उद्देश्य शासन व्यवस्था में ‘सेवा’ और ‘लोक’ (जनता) की सर्वोच्चता स्थापित करना है। सरकार का मानना है कि ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च स्थान है, इसलिए ‘सेवा तीर्थ’ नाम इसकी कार्यसंस्कृति को बेहतर ढंग से परिभाषित करता है।

वहीं, ‘राजभवन’ शब्द ब्रिटिश काल की विरासत और ‘राज’ (शासन) का आभास कराता है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है, इसलिए राज्यपालों के आधिकारिक आवासों को ‘लोकभवन’ नाम देना उन्हें आम जनमानस के करीब लाने का एक प्रतीकात्मक प्रयास है।

यह निर्णय मोदी सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में किए गए उन बदलावों की अगली कड़ी है, जिनका उद्देश्य गुलामी के प्रतीकों को हटाना है। इससे पहले, दिल्ली के ऐतिहासिक ‘राजपथ’ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था, जिसने शासक और प्रजा के संबंध को कर्तव्य की भावना में बदल दिया। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के ध्वज से भी सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरित निशान को अपनाया गया था।

PMO और राजभवनों का नाम बदलना केवल एक शब्दावली का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक दृष्टिकोण में एक बुनियादी बदलाव का संकेत है। यह कदम अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को निरंतर यह याद दिलाएगा कि उनका प्राथमिक दायित्व जनता की सेवा है।

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इस बदलाव को लेकर जल्द ही आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) जारी किए जाने की संभावना है, जिसके बाद सभी सरकारी पत्राचारों और साइनबोर्डों पर नए नामों का उपयोग शुरू हो जाएगा।

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