भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में जिसका हाथ, जानें कौन है अमोल मजूमदार?

क्रिकेट के मैदान पर कभी-कभी जीत का जश्न सिर्फ खिलाड़ियों का नहीं होता, बल्कि उन कोचों का भी होता है जिन्होंने कभी नीली जर्सी न पहन सकने का दर्द झेला हो। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार की, जिन्होंने टीम इंडिया को महिला वनडे विश्व कप 2025 का खिताब दिलाकर इतिहास रच दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में 52 रनों से मिली इस शानदार जीत ने न सिर्फ देश को गर्वान्वित किया, बल्कि अमोल मजूमदार की संघर्षपूर्ण यात्रा को भी अमर कर दिया।

अमोल मजूमदार की शुरुआती जिंदगी: सपनों का पीछा मुंबई के गलियों से निकलकर क्रिकेट के मैदान पर कदम रखने वाले अमोल मजूमदार का जन्म 1974 में हुआ था। बचपन से ही वे सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे दिग्गजों के साथ खेलते थे। मात्र 13 साल की उम्र में, जब वे ड्रेसिंग रूम में पैड पहनकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, तो मैच खत्म हो गया। यह पहला झटका था, जो उनके जीवन का हिस्सा बन गया। फिर भी, हार मानने वाले में अमोल मजूमदार ने कभी नहीं थे।

घरेलू क्रिकेट में उन्होंने धमाल मचा दिया। मुंबई की ओर से खेलते हुए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 20 सत्रों में 11,000 से अधिक रन ठोके, जिसमें एक पारी में 260 रनों का विस्फोटक रिकॉर्ड भी शामिल है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन समिति ने कभी उन्हें मौका नहीं दिया। टीम इंडिया के मध्यक्रम में राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली जैसे सितारे विराजमान थे, और अमोल मजूमदार का सपना अधूरा रह गया। कई बार दिल टूटा, लेकिन उन्होंने बल्ला संभाला और कोचिंग की दुनिया में कूद पड़े।

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कोचिंग की राह: धैर्य और समर्पण की मिसाल बल्लेबाजी छोड़कर अमोल मजूमदार ने कोचिंग को अपनाया। वे भारत की अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के कोच बने, फिर नीदरलैंड्स टीम को निखारने में मदद की। 2023 में उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मुख्य कोच बनाया गया। यहां से उनकी असली कहानी शुरू हुई।

टीम इंडिया को उन्होंने सिर्फ बल्लेबाजी के गुर नहीं सिखाए, बल्कि हार को सीख और जीत को आदत बनाने का मंत्र दिया। लगातार तीन हारों के बाद भी वे खिलाड़ियों से कहते रहे, “हम हार नहीं रहे, सीख रहे हैं।” फाइनल से पहले टीम हडल में उनका संदेश था- “अपनी कहानी खुद लिखो, इतिहास रचो। सात घंटे के लिए बाहरी शोर को बंद करो, अपना बबल बनाओ।” यह शब्द हरमनप्रीत कौर और उनकी शेरनियों के दिलों में उतर गए।

विश्व कप 2025: चक दे इंडिया का कबीर खान महिला विश्व कप 2025 का फाइनल डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट पर 298 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका 246 पर सिमट गई। जीत के ठीक बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर दौड़कर अमोल मजूमदार के पास पहुंचीं। उन्होंने उनके पैर छुए, गले लगाया और फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह दृश्य शाहरुख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ के कबीर खान की याद दिला गया।

अमोल मजूमदार ने जीत के बाद कहा, “मैं निशब्द हूं। बेहद गर्व महसूस हो रहा है। यह खिलाड़ियों की मेहनत और विश्वास का नतीजा है। उन्होंने हर भारतीय का सिर ऊंचा कर दिया।” दो साल के कार्यकाल में उन्होंने टीम को ऐसा आत्मविश्वास दिया, जो कभी हार न माने। जेमिमाह रॉड्रिग्स जैसी युवा खिलाड़ियों को निखारने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।

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अमोल मजूमदार की कहानी: प्रेरणा का स्रोत अमोल मजूमदार की जिंदगी साबित करती है कि मौके न मिलें तो खुद मौके बनाओ। जो खिलाड़ी कभी टीम इंडिया का हिस्सा न बन सका, वही कोच बनकर देश को पहला आईसीसी महिला विश्व कप दिला दिया। यह कहानी युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है- संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। भारतीय महिला क्रिकेट के इस नए दौर में अमोल मजूमदार जैसे गुरु ही असली हीरो हैं।

-एडिटोरियल टीम, द न्यूजवाला (www.thenewswala.com)

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