अरुण गवली जेल से रिहा: 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से बेल, जानें मुंबई के ‘डैडी’ की क्राइम स्टोरी

मुंबई, 3 सितंबर 2025: मुंबई के कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन और पूर्व विधायक अरुण गवली को 17 साल की कैद के बाद आज नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। 76 वर्षीय गवली को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जमानत दी थी, जिसके बाद सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें दोपहर करीब 12:30 बजे जेल से बाहर किया गया। गवली शिवसेना नेता कमलाकर जामसंदेकर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उनके रिहा होने की खबर से मुंबई के दगड़ी चॉल इलाके में जश्न का माहौल है, जहां उन्हें ‘डैडी’ के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं अरुण गवली की पूरी क्राइम कुंडली और उनके जीवन की प्रमुख घटनाएं।

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने 76 साल की उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर गवली को जमानत दी। वे 2012 से नागपुर जेल में बंद थे।

  • मामला: गवली को 2005 में शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसंदेकर की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। अगस्त 2012 में मुंबई सेशन कोर्ट ने उन्हें और 11 अन्य को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

  • जेल से बाहर: रिहाई के बाद गवली मुंबई लौटेंगे, जहां उनके समर्थक उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।

अरुण गुलाब गवली का जन्म 17 जुलाई 1955 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव में हुआ था। मिल वर्कर से अंडरवर्ल्ड डॉन बनने तक की उनकी कहानी हिंसा, प्रतिद्वंद्विता और राजनीति से भरी हुई है। यहां उनकी प्रमुख क्राइम घटनाओं का क्रमवार विवरण है:

1970 का दशक: अपराध की दुनिया में प्रवेश

  • शुरुआती नौकरियां: गवली ने सिंप्लेक्स मिल्स, गोडरेज एंड बॉयस और क्रॉम्पटन ग्रीव्स जैसी कंपनियों में काम किया।

  • गैंग में शामिल होना: 1970 के दशक में वे अपने भाई किशोर (पप्पा) के साथ ‘बायकुला कंपनी’ गैंग में शामिल हुए, जिसकी अगुवाई रामा नाइक और बाबू रेशिम कर रहे थे। यह गैंग मुंबई के बायकुला, परेल और सात रास्ता इलाकों में सक्रिय थी।

  • राइवल्स का सफाया: 1977-1980 के बीच गैंग ने कुंदन दुबे, मोहन सरमलकर और शशि रसम (कोबरा गैंग के लीडर) जैसे प्रतिद्वंद्वियों को खत्म किया। गवली को ‘सुपारी किंग’ के नाम से जाना जाने लगा, क्योंकि वे दाऊद इब्राहिम के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलिंग करते थे।

यह भी देखें  ‘गिव-अप’ अभियान: सक्षम व्यक्तियों से योजना में नाम हटवाने की अपील, 31 जनवरी तक का समय

1980 का दशक: दाऊद से दोस्ती और दुश्मनी

  • दाऊद के साथ गठजोड़: 1984 में दाऊद के भाई साबिर की हत्या के बाद गवली की गैंग ने पठान गैंग के समद खान की हत्या की योजना बनाई। 1984 से 1988 तक गवली और नाइक ने दाऊद के लिए मुंबई में मुख्य आपराधिक ऑपरेशन चलाए।

  • फॉलआउट: 1988 में जोगेश्वरी की जमीन पर विवाद के कारण रामा नाइक और दाऊद के गुर्गे शरद शेट्टी के बीच झगड़ा हुआ। दाऊद ने शेट्टी का साथ दिया, जिससे नाइक नाराज हो गए।

  • रामा नाइक की मौत: 1988 में नाइक की फर्जी पुलिस एनकाउंटर में हत्या हो गई, जिसका आरोप गवली ने दाऊद पर लगाया। इसके बाद गवली और दाऊद के बीच गैंगवार शुरू हो गया, जिसमें कई शूटआउट और मौतें हुईं।

  • गैंग का विस्तार: नाइक की मौत के बाद गवली ने बायकुला कंपनी को संभाला और दगड़ी चॉल से ऑपरेट किया। वे एक्सटॉर्शन, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और प्रोटेक्शन रैकेट में शामिल थे।

1990 का दशक: गिरफ्तारियां और राजनीतिक एंट्री

  • गिरफ्तारियां: 1994 में गवली को गिरफ्तार किया गया, जिसे वे दाऊद की साजिश बताते हैं। मुंबई पुलिस ने दगड़ी चॉल पर कई रेड कीं, जिससे उनके अंडरवर्ल्ड ऑपरेशन कमजोर हुए।

  • शिवसेना से रिश्ता: 1980 के दशक में बाल ठाकरे ने गवली जैसे हिंदू गैंगस्टर्स का समर्थन किया, उन्हें ‘अमची मुलगे’ कहा। लेकिन 1990 के मध्य में रिश्ता बिगड़ा और गवली ने शिवसेना सदस्यों की हत्या की।

  • राजनीति में प्रवेश: 1990 के मध्य में गवली ने अखिल भारतीय सेना पार्टी बनाई। 2004 में वे चिंचपोकली से विधायक चुने गए (2004-2009)।

यह भी देखें  अनुशासन में रहते हुए लक्ष्य प्राप्ति के महत्व को बताया

2000 का दशक: हत्या का मामला और सजा

  • जामसंदेकर हत्या: 2005 में शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसंदेकर की हत्या में गवली का नाम आया। सीबीआई की IPS जयंती नायडू ने 138 पेज की चार्जशीट तैयार की।

  • ट्रायल और सजा: 2006 में गिरफ्तार। अगस्त 2012 में मुंबई सेशन कोर्ट ने उन्हें और 11 अन्य को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा दी।

  • अन्य मामले: कई मामलों में बरी हुए, जैसे 2005 के एक्सटॉर्शन केस में मई 2025 में बरी। गवली पर एक्सटॉर्शन, मर्डर और अन्य अपराधों के कई केस थे, लेकिन गवाहों के डर से सजा मुश्किल थी।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

  • पत्नी: जुबैदा मुजावर से शादी, जो हिंदू बनकर आशा गवली बनीं। वे भी महाराष्ट्र की पूर्व विधायक हैं।

  • बच्चे: पांच बच्चे – दो बेटे (महेश) और तीन बेटियां (गीता, योगिता, अपर्णा)। गीता अखिल भारतीय सेना से कॉर्पोरेटर रहीं।

  • भतीजा: सचिन अहिर ने गवली का साथ छोड़ शरद पवार की NCP जॉइन की।

गवली को दगड़ी चॉल में ‘डैडी’ कहा जाता है, जहां वे गरीबों की मदद करने के लिए मशहूर थे। लेकिन उनकी क्राइम स्टोरी मुंबई अंडरवर्ल्ड की हिंसक गैंगवारों से जुड़ी है। उनकी जीवन पर ‘डैडी’ नाम की फिल्म भी बनी है, जिसमें अर्जुन रामपाल ने उनकी भूमिका निभाई। अरुण गवली की रिहाई मुंबई अंडरवर्ल्ड के एक अध्याय का अंत है, लेकिन उनकी क्राइम कुंडली अभी भी विवादों से भरी है। 17 साल जेल में बिताने के बाद अब वे क्या करेंगे, यह देखना बाकी है। क्या वे राजनीति में वापसी करेंगे या शांत जीवन जिएंगे? समय बताएगा।

यह भी देखें  EVM पर उम्मीदवारों के रंगीन फोटो: बिहार चुनाव से नई शुरुआत

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट्स के लिए TheNewsWala.com पर बने रहें!

About Author

Leave a Reply

error: Content is protected !!