रक्षाबंधन 2025: भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व, जानिए इस दिन का महत्व, पूजा विधि और परंपराएं

  • स्थान: नई दिल्ली, ✍ रिपोर्टर: सीमा शर्मा, The Newswala

रक्षाबंधन भारत के सबसे पवित्र और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, जिसे सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह पर्व भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं, जबकि भाई जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

रक्षाबंधन का इतिहास बेहद समृद्ध है और इससे जुड़ी कई पौराणिक व ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं।

  1. श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा – महाभारत में वर्णन मिलता है कि एक बार श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लग गई, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया। श्रीकृष्ण ने जीवनभर उनकी रक्षा का वचन निभाया।

  2. राजा बलि और माता लक्ष्मी – भागवत पुराण में वर्णन है कि माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया और इस तरह विष्णु भगवान को वापस वैकुंठ ले आईं।

  3. ऐतिहासिक उदाहरण – कहा जाता है कि चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर अपने राज्य की रक्षा की गुहार लगाई थी। हुमायूं ने इस रिश्ते का मान रखते हुए उनकी रक्षा की।

रक्षाबंधन केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह समाज में पारिवारिक एकता, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है। यह त्योहार हमें यह संदेश देता है कि रिश्तों की डोर केवल खून के रिश्तों से ही नहीं, बल्कि विश्वास और भावनाओं से भी जुड़ी होती है।

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रक्षाबंधन पर सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें और भगवान गणेश व भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें।

  • भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में बैठाएं।

  • तिलक लगाएं, आरती उतारें और राखी बांधें।

  • मिठाई खिलाएं और भाई की लंबी उम्र व खुशहाली की कामना करें।

  • भाई बहन को उपहार और आशीर्वाद दें।

हाल के वर्षों में लोगों को प्लास्टिक और केमिकल युक्त राखियों की जगह स्वदेशी, इको-फ्रेंडली और हाथ से बनी राखियां खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायों को भी आर्थिक सहयोग मिलता है। आज के समय में रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हर उस रिश्ते में मनाया जाने लगा है जिसमें सुरक्षा और स्नेह का वादा हो। कई जगहों पर बहनें अपने दोस्तों, गुरु या यहां तक कि सैनिकों को भी राखी बांधती हैं। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो समय के साथ बदलते हुए भी अपनी मूल भावना – प्रेम, विश्वास और सुरक्षा – को बनाए हुए है। इस पवित्र दिन पर न केवल हमें अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहिए, बल्कि समाज में भाईचारे और एकता का संदेश भी फैलाना चाहिए।

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