UPI पेमेंट में क्रांति: फिंगरप्रिंट से जल्द होगी सुरक्षित और आसान लेनदेन

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) जल्द ही UPI पेमेंट्स के लिए बायोमेट्रिक आधारित प्रमाणीकरण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस नई सुविधा के तहत उपयोगकर्ता फिंगरप्रिंट या फेसियल रिकग्निशन के जरिए पेमेंट कर सकेंगे, जिससे मौजूदा पिन-आधारित सिस्टम वैकल्पिक हो जाएगा।

वर्तमान में UPI लेनदेन को अधिकृत करने के लिए 4-6 अंकों के पिन का उपयोग किया जाता है। हालांकि, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की शुरूआत से न केवल लेनदेन की प्रक्रिया और सरल होगी, बल्कि यह सुरक्षा के स्तर को भी बढ़ाएगी। NPCI ने इस पहल को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स के साथ चर्चा शुरू की है, और इस सुविधा को लागू करने में कुछ महीनों का समय लग सकता है। प्रारंभिक चरण में पिन और बायोमेट्रिक दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

यह कदम डिजिटल पेमेंट्स को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेट्रिक डेटा, जैसे फिंगरप्रिंट, को हैक करना या नकल करना मुश्किल होता है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को बार-बार पिन याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे छोटे-मोटे लेनदेन में तेजी आएगी।

हालांकि, इस सुविधा के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता उपायों की आवश्यकता होगी, ताकि उपयोगकर्ताओं का बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रहे। NPCI ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि बायोमेट्रिक डेटा डिवाइस पर ही रहेगा और केवल एन्क्रिप्टेड कुंजी बैंक के साथ साझा की जाएगी।

UPI, जो 2016 में शुरू हुआ था, वर्तमान में भारत में डिजिटल लेनदेन का 80% हिस्सा संभालता है और हर महीने 14 बिलियन से अधिक लेनदेन प्रोसेस करता है। इस नई सुविधा के लागू होने से UPI की लोकप्रियता और उपयोगिता में और इजाफा होने की उम्मीद है।

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