इफको ने नैनो डीएपी से जड़ शोधन का किया प्रदर्शन, किसानों को मिल रहे हैं शानदार परिणाम
मीरजापुर: किसानों को आधुनिक और किफायती कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से इफको (IFFCO) द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को मीरजापुर जनपद के अदलहाट क्षेत्र के शिवपुर ग्राम सभा में नैनो डीएपी से जड़ शोधन का सफल प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय कृषक श्री प्रभाकर मौर्य के खेत पर आयोजित किया गया।
इस मौके पर इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री आशीष श्रीवास्तव और एसएफए श्री रितेश पांडेय विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि इफको प्रतिदिन किसानों को नैनो उर्वरकों के महत्व और लाभों के प्रति जागरूक कर रहा है, ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और खेतों की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहे।
एसएफए रितेश पांडेय ने जानकारी दी कि अब तक जिले में लगभग 30 किसानों के खेतों में नैनो डीएपी से जड़ शोधन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ड्रोन तकनीक से नैनो उत्पादों का छिड़काव किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम किसानों को मिले। यही कारण है कि इस वर्ष किसान स्वयं आगे बढ़कर नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं।
नैनो डीएपी से जड़ शोधन के लिए 1 लीटर पानी में 5 मिलीलीटर नैनो डीएपी मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल में धान की नर्सरी की जड़ों को 15 से 20 मिनट तक डुबोकर रोपाई की जाती है। इससे पौधों की जड़ों का विकास तेज होता है और वे सूखे तथा बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल पौधों की वृद्धि बेहतर होती है, बल्कि दानेदार डीएपी की खपत में भी लगभग 50% तक की कमी लाई जा सकती है। उदाहरणस्वरूप, जहां एक बिस्वा खेत में 1 किलो दानेदार डीएपी लगता है, वहीं जड़ शोधन के बाद मात्र आधा किलो पर्याप्त होता है। इससे किसानों की लागत में कमी आती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।इफको का यह प्रयास किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। नैनो तकनीक से खेती न सिर्फ आधुनिक हो रही है, बल्कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक सकारात्मक कदम है। किसानों को ऐसे आयोजनों से लाभ उठाकर अपनी उपज और आय दोनों में वृद्धि करनी चाहिए।
रिपोर्ट: अभिजीत श्रीवास्तव, मीरजापुर