JNU ने तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ MoU निलंबित किया: कहा- “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, हम देश के साथ हैं”

नई दिल्ली, 14 मई 2025: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हवाले से तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपने शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (MoU) को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह फैसला भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और तुर्की के पाकिस्तान के प्रति खुले समर्थन के बाद लिया गया है। JNU ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर, JNU और इनोनू यूनिवर्सिटी, तुर्की के बीच MoU निलंबित किया जाता है। JNU राष्ट्र के साथ खड़ा है। #NationFirst”

JNU और इनोनू यूनिवर्सिटी के बीच यह समझौता 3 फरवरी 2025 को तीन साल के लिए हस्ताक्षरित हुआ था और फरवरी 2028 तक प्रभावी रहना था। इसका उद्देश्य शिक्षक-छात्र विनिमय, शोध सहयोग, और संयुक्त प्रकाशन को बढ़ावा देना था। हालांकि, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, और इसके जवाब में भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तुर्की ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने भारतीय सैन्य कार्रवाइयों के शिकार लोगों को “शहीद” करार दिया और पाकिस्तान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके बाद भारत में तुर्की के खिलाफ विरोध तेज हो गया। प्रमुख यात्रा मंचों ने तुर्की की बुकिंग्स निलंबित कर दीं, और भारतीय व्यापारियों ने तुर्की के सेब और मार्बल जैसे उत्पादों का आयात रोक दिया। JNU का यह कदम “बॉयकॉट तुर्की” अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

JNU ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर लिखा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के विचारों के कारण, JNU और इनोनू यूनिवर्सिटी, तुर्की के बीच MoU अगले आदेश तक निलंबित है। JNU राष्ट्र के साथ खड़ा है।” विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय देशहित को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

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X पर कई यूजर्स ने JNU के इस फैसले की सराहना की। @TheParvati ने लिखा, “भारत की प्रतिष्ठित JNU ने तुर्की विश्वविद्यालय के साथ समझौता रद्द कर दिया क्योंकि तुर्की ने पाकिस्तान को भारत पर हमला करने के लिए रक्षा उपकरणों के साथ मदद की थी।” @TV9Bharatvarsh ने इसे “राष्ट्र के साथ खड़े होने” का प्रतीक बताया।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या यह कदम केवल प्रतीकात्मक है या वास्तव में इसका कोई ठोस प्रभाव पड़ेगा। @suryakantvsnl ने लिखा कि निलंबन का सटीक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, जिससे कुछ असमंजस की स्थिति बनी है।

इस फैसले से JNU और इनोनू यूनिवर्सिटी के बीच चल रहे शोध सहयोग, शिक्षक-छात्र विनिमय, और संयुक्त प्रकाशनों पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा। यह कदम भारत और तुर्की के बीच शैक्षणिक संबंधों में और तनाव पैदा कर सकता है।

JNU के इस कदम को भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो तुर्की के पाकिस्तान के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के खिलाफ एक मजबूत संदेश देना चाहता है। भारत सरकार ने भी तुर्की के इस रुख की आलोचना की है, और विदेश मंत्रालय ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब भारत में तुर्की के खिलाफ भावनाएं तीव्र हैं। पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, भारत ने तुर्की के साथ कई व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों पर पुनर्विचार शुरू किया है। JNU का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अन्य भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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