बरेली में रिश्वत की पहली EMI लेते सहायक चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार

बरेली, 14 मई 2025: उत्तर प्रदेश के बरेली में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक चकबंदी अधिकारी (ACO) महेश सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। महेश सिंह ने फरीदपुर तहसील क्षेत्र के एक किसान से जमीन की चकबंदी के लिए 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसे दो किश्तों में लेने का सौदा तय हुआ था। विजिलेंस टीम ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाकर अधिकारी को तहसील परिसर से गिरफ्तार किया।

फरीदपुर तहसील के गांव गजनेरा निवासी किसान टंडन बाबू ने अपनी मां कलावती की मृत्यु के बाद पैतृक कृषि भूमि को अपने और अपने भाइयों के नाम दर्ज कराने के लिए चकबंदी विभाग में आवेदन किया था। सहायक चकबंदी अधिकारी महेश सिंह ने इस काम के लिए 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी और इसे दो किश्तों में लेने की बात कही। पहली किश्त के रूप में 10 हजार रुपये देने की शर्त पर सौदा तय हुआ।

टंडन बाबू ने इसकी लिखित शिकायत बरेली की भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) इकाई से की। शिकायत की पुष्टि के बाद, डिप्टी एसपी यशपाल सिंह के नेतृत्व में विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया। मंगलवार को तहसील परिसर के गेट पर जैसे ही महेश सिंह ने टंडन बाबू से 10 हजार रुपये की पहली किश्त ली, विजिलेंस टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

ACO के डिप्टी एसपी यशपाल सिंह ने बताया कि शिकायत की जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद, सुनियोजित तरीके से रिश्वत की रकम को रासायनिक पाउडर से चिह्नित किया गया। जैसे ही महेश सिंह ने रकम ली, टीम ने उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी फरीदपुर तहसील परिसर के गेट के पास हुई। रिश्वत की रकम भी मौके से बरामद कर ली गई।

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महेश सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 7 (सार्वजनिक सेवक द्वारा रिश्वत लेना) के तहत इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और मामले की आगे की जांच जारी है।

इस घटना ने बरेली और आसपास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भ्रष्ट अधिकारियों को न केवल सस्पेंड किया जाए, बल्कि उनकी नौकरी से बर्खास्तगी और जेल की सजा भी दी जाए। X पर कई यूजर्स ने इस कार्रवाई की सराहना की। @bstvlive ने लिखा, “बरेली में सहायक चकबंदी अधिकारी 10 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया। यह योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का नतीजा है।” @Knewsindia ने भी इस कार्रवाई को “भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम” बताया।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। @News1IndiaTweet ने लिखा, “जमीन की पैमाइश और चकबंदी के नाम पर रिश्वत का खेल कब खत्म होगा? सरकार को और सख्ती करनी होगी।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर देते हुए कहा था कि मिलावटखोरों और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बरेली में यह ताजा कार्रवाई उसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भ्रष्टाचार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो और दोषियों को सजा दी जाए।

बरेली में हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। अप्रैल 2025 में चकबंदी विभाग के लेखपाल महावीर सिंह को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। अगस्त 2024 में चकबंदी विभाग के कनिष्ठ लिपिक अभय सक्सेना को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इन घटनाओं ने चकबंदी और राजस्व विभागों में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर किया है।

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विजिलेंस टीम ने बताया कि महेश सिंह के साथ-साथ अन्य संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। चकबंदी विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी गई है, और विभागीय जांच शुरू हो गई है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए नियमित छापेमारी और सख्त सजा जरूरी है।

यह घटना न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाती है, बल्कि आम जनता में जागरूकता की जरूरत को भी रेखांकित करती है। विजिलेंस ने लोगों से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार की शिकायत हेल्पलाइन नंबर 9454402484 या ईमेल aco@nic.in पर दर्ज कराएं।

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