पाकिस्तान ने BSF जवान को रिहा किया, 21 दिन बाद भारत लौटा

अमृतसर, 14 मई 2025: पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा 21 दिन पहले हिरासत में लिए गए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम कुमार साहू को बुधवार को रिहा कर दिया गया। साहू को अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर सुबह करीब 10:30 बजे भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया। यह घटना भारत के कड़े राजनयिक दबाव और लगातार फ्लैग मीटिंग्स के बाद हुई, जो पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में जवान के गलती से सीमा पार करने के बाद शुरू हुई थी।

BSF के 182वीं बटालियन के जवान पूर्णम कुमार साहू, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के निवासी हैं, 23 अप्रैल 2025 को फिरोजपुर बॉर्डर पर किसानों की सहायता के दौरान अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए थे। वह अपनी सर्विस राइफल के साथ वर्दी में थे और छाया में आराम करने के लिए आगे बढ़े थे, जब पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर साहू की आंखों पर पट्टी बंधी तस्वीरें वायरल हुईं, जिससे उनके परिवार और भारतीय अधिकारियों में चिंता बढ़ गई थी।

यह घटना जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के ठीक एक दिन बाद हुई, जिसमें 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। इस हमले ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया था, जिसके कारण साहू की रिहाई में देरी हुई।

BSF और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच साहू की रिहाई के लिए सात से अधिक फ्लैग मीटिंग्स हुईं, लेकिन पाकिस्तानी पक्ष बार-बार “वरिष्ठ अधिकारियों से आदेश न मिलने” का हवाला देकर टालमटोल करता रहा। भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और राजनयिक स्तर पर दबाव बनाया। साहू की पत्नी रजनी, जो गर्भवती हैं, अपने बेटे और रिश्तेदारों के साथ पठानकोट गई थीं, जहां उन्होंने BSF के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपने पति की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई थी।

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पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता सुवendu अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इस मामले को उठाया और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। BSF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ऐसी घटनाएं आमतौर पर कुछ घंटों में सुलझ जाती हैं, लेकिन पहलगाम हमले के बाद बढ़े तनाव के कारण पाकिस्तान ने जानबूझकर देरी की।”

बुधवार को अटारी बॉर्डर पर जॉइंट चेक पोस्ट के माध्यम से साहू को औपचारिक रूप से भारत को सौंपा गया। BSF ने एक बयान में कहा, “जवान पूर्णम कुमार साहू को आज सुबह 10:30 बजे अटारी, अमृतसर में शांतिपूर्ण तरीके से और स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार सौंपा गया।” साहू की रिहाई की खबर ने उनके परिवार और समुदाय में राहत की लहर दौड़ा दी। उनकी मां ने कहा, “हमारे बेटे की वापसी के लिए हम सरकार और BSF का धन्यवाद करते हैं।”

X पर कई यूजर्स ने इस घटना को “नए भारत की ताकत” बताते हुए सरकार के कड़े रुख की सराहना की। @Sudhanshuz ने लिखा, “ये है नया भारत जो अपने हर जवान के लिए आखिरी सांस तक लड़ता है।” वहीं, कुछ यूजर्स ने पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाए और इसे पहलगाम हमले से जोड़कर देखा।

इस घटना के बाद BSF ने अपने जवानों को सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सीमा पर बाड़ केवल भारतीय पक्ष में है, और अंतरराष्ट्रीय सीमा को छोटे पिलर से चिह्नित किया जाता है, जो नए जवानों के लिए पहचानना मुश्किल हो सकता है।” BSF ने अपनी इकाइयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे गश्त के दौरान सीमा पार करने से बचें। यह घटना भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। साहू की रिहाई ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच सैन्य प्रोटोकॉल और राजनयिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया है।

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