बीजेपी विधायक की विधायकी पर लटकी तलवा
जयपुर, 2 मई 2025: राजस्थान के अंता से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने एक मामले में उनकी तीन साल की सजा को बरकरार रखा है, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होने की संभावना बढ़ गई है। इस फैसले ने राजस्थान की सियासत में भूचाल ला दिया है, और अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।
यह मामला 2004 का है, जब कंवरलाल मीणा पर झालावाड़ के अकलेरा में उपखंड अधिकारी (एसडीएम) पर रिवॉल्वर तानने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा था। निचली अदालत (एडीजे, अकलेरा) ने उन्हें तीन साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना सुनाया था। मीणा ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन शुक्रवार को हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत की सजा को सही ठहराया।
जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि को दो साल से अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो सकती है। कंवरलाल मीणा को तीन साल की सजा सुनाई गई है, जिसके चलते उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। अगर विधानसभा अध्यक्ष इस सजा के आधार पर कार्रवाई करते हैं, तो अंता सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी के अंदर और बाहर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नेतृत्व इस मामले पर कानूनी सलाह ले रहा है, और कंवरलाल मीणा सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। अगर उनकी सदस्यता रद्द होती है, तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि अंता में मीणा का मजबूत जनाधार है। दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य इस मौके को भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं।
कंवरलाल मीणा ने इस फैसले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला “राजनीति से प्रेरित” है। अंता में उनके समर्थकों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, और सोशल मीडिया पर #JusticeForKanwarlal ट्रेंड कर रहा है। स्थानीय लोग इस मामले को लेकर बंटे हुए हैं—कुछ मीणा को निर्दोष मानते हैं, तो कुछ कानून के पालन की वकालत कर रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कंवरलाल मीणा के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का रास्ता खुला है। अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा पर रोक लगाता है, तो उनकी विधायकी बच सकती है। हालांकि, अगर विधानसभा अध्यक्ष जल्द कार्रवाई करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द होने में देरी नहीं होगी। इस बीच, बीजेपी को अंता में नया चेहरा तलाशना पड़ सकता है, जो पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।
कंवरलाल मीणा की विधायकी पर मंडराता यह संकट न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए चुनौती है, बल्कि राजस्थान की सियासत में भी एक नया मोड़ ला सकता है। हाईकोर्ट के फैसले ने बीजेपी के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है, और अब यह देखना बाकी है कि क्या मीणा अपनी सीट बचा पाएंगे या अंता में उपचुनाव का रास्ता खुलेगा। इस सियासी ड्रामे का अगला अध्याय क्या होगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।