भारत-फ्रांस राफेल डील: 63 हजार करोड़ में 26 राफेल मरीन जेट्स, 2028 में पहला जेट भारत पहुंचेगा
नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2025 – भारत और फ्रांस ने एक ऐतिहासिक रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारतीय नौसेना को 63 हजार करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स मिलेंगे। यह सौदा भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा, खासकर स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत के लिए। पहला राफेल मरीन जेट 2028 में भारत पहुंचेगा, और सभी जेट्स की डिलीवरी 2032 तक पूरी होने की उम्मीद है।
सौदे की मुख्य बातें:
- 26 राफेल मरीन जेट्स: ये जेट्स फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित हैं और विशेष रूप से नौसैनिक ऑपरेशंस के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- लागत: 63 हजार करोड़ रुपये, जिसमें जेट्स, हथियार, प्रशिक्षण, और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल हैं।
- डिलीवरी शेड्यूल: पहला जेट 2028 में भारत पहुंचेगा, और बाकी जेट्स 2032 तक चरणबद्ध तरीके से डिलीवर होंगे।
- उद्देश्य: भारतीय नौसेना के लिए INS विक्रांत और अन्य विमानवाहक पोतों पर तैनाती, जिससे समुद्री युद्ध क्षमता बढ़ेगी।
- अतिरिक्त सुविधाएं: सौदे में मिसाइल सिस्टम, सिमुलेटर, और रखरखाव सुविधाएं भी शामिल हैं।
सामरिक महत्व: राफेल मरीन जेट्स भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देंगे। ये जेट्स मल्टी-रोल फाइटर हैं, जो हवा से हवा और हवा से ज़मीन दोनों तरह के मिशनों में सक्षम हैं। यह सौदा भारत-फ्रांस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि कुछ हिस्सों का निर्माण भारत में हो सकता है।
पृष्ठभूमि: यह सौदा 2016 में हुए 36 राफेल जेट्स (वायुसेना के लिए) के सौदे का विस्तार है। राफेल मरीन जेट्स को विशेष रूप से विमानवाहक पोतों पर ऑपरेशन के लिए अनुकूलित किया गया है, जिसमें फोल्डेबल विंग्स और मजबूत लैंडिंग गियर शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय: रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। राफेल मरीन जेट्स की तैनाती से भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी।