सांसदों की सैलरी 24% बढ़ी: जेब भरी, जनता ठगी!

तो जनाब, ताज़ा खबर ये है कि 24 मार्च 2025 तक सांसदों की सैलरी में 24% की मोटी बढ़ोतरी हो गई है। पहले जहाँ नेताजी ₹1 लाख में महीना काटते थे, अब उनकी जेब में हर महीने ₹1.24 लाख की घंटी बजने वाली है। न्यूज़ चैनलों पर हेडलाइन चमक रही है – “सांसदों को महंगाई भत्ता, जनता को बस महंगाई!” और बस, इसी खबर ने नेताओं को मज़े लेने का मौका दे दिया और जनता को कटाक्ष करने का बहाना!

एक नेताजी तो सुबह-सुबह न्यूज़ देखते ही कुर्सी से उछल पड़े। बोले, “देखा, मेरी मेहनत का फल मिल गया! अब तो संसद में नया कुर्ता पहनकर जाऊंगा, वो भी स्टार्च वाला!” बीवी ने टोका, “मेहनत? वो जो संसद में माइक बंद होने तक चिल्लाते हो और फिर AC कमरे में सो जाते हो?” नेताजी हंसते हुए बोले, “अरे, ये जनसेवा का स्टाइल है, जनता को नहीं समझेगा!” उधर जनता टीवी पर न्यूज़ देखकर सोच रही है, “साहब, आपकी सैलरी तो बढ़ गई, हमारी बारी कब आएगी? या हमारा काम सिर्फ टैक्स भरकर आपके कुर्ते की सिलवटें चमकाना है?”

एक और नेताजी ने तो गाँव की चौपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला ली। माइक पकड़कर बोले, “ये सैलरी बढ़ोतरी हमारी नहीं, आपके लिए है। अब हम और जोश से आपके लिए काम करेंगे!” पास खड़ा एक चाचा चाय की चुस्की लेते हुए बुदबुदाया, “हां साहब, जोश तो दिखता है – कुर्सी बचाने में, वोट मांगने में, और अब जेब भरने में!” नेताजी ने सुना तो हंसी के साथ टाल दिया, “अरे चाचा, न्यूज़ में तो लिखा है कि ये हमारा हक है!” चाचा ने जवाब दिया, “हक तो हमारा भी बनता है, पर हमारी सैलरी की न्यूज़ कब आएगी? या वो सिर्फ चुनावी वादों की हेडलाइन तक सीमित है?”

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फिर एक बूढ़े सांसद साहब थे, जो सातवीं बार कुर्सी पर काबिज हैं। न्यूज़ वालों ने जब माइक थमाया तो बोले, “ये बढ़ोतरी मेरे लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए है। हमें तो बस देश की सेवा करनी है!” रिपोर्टर ने पूछा, “मतलब आपकी सातवीं टर्म भी जनता के लिए है?” नेताजी मुस्कुराए, “बिल्कुल, मैं तो अनुभव का खजाना हूँ!” जनता टीवी पर देखकर तंज कस रही है, “हां साहब, खजाना तो आपकी जेब में जा रहा है, हम तो बस वोट के सिक्के डालने वाली मशीन बन गए हैं!”

और हद तो तब हुई जब एक नेताजी ने न्यूज़ चैनल पर बहस में कहा, “हमें पहले कम मिलता था, अब थोड़ा ठीक हुआ। महंगाई के जमाने में गुजारा मुश्किल था!” ये सुनकर जनता के सब्र का बांध टूट गया। एक ट्वीट आया, “नेताजी, ₹1 लाख में गुजारा नहीं हो रहा था, तो हमारा क्या, जो ₹10-15 हजार में बच्चों की फीस और राशन चला रहे हैं? आपके लिए महंगाई है, हमारे लिए तो जिंदगी का सवाल है!” लेकिन नेताजी कहाँ सुनने वाले हैं, वो तो अगली न्यूज़ हेडलाइन का इंतज़ार कर रहे हैं – शायद अगली बार भत्ते भी बढ़ जाएँ!

तो बस, न्यूज़ ये कह रही है कि सांसदों की सैलरी बढ़ गई, पर जनता का मज़ाक उड़ाने का सिलसिला वही पुराना है। नेताजी जेब भर रहे हैं, और जनता हंसी-मजाक में कह रही है, “साहब, अगली बार वोट की कीमत भी 24% बढ़ा देना, फिर देखते हैं कितना जोश दिखाते हो!”

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एम के पांडे
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