यूपी में ब्राह्मण की राजनीति – हरि शरण ओझा

बहुत दुखद है जब एक ब्राह्मण मंत्री ने सामाजिक तौर पर पत्रकारों से गलत ढंग से पेश आ रहे हैं, अपशब्द बोल रहे हैं। कहा जा रहा है कि इनका स्वभाव ही ऐसा है, ये पहले से ही दबंग हैं। इनके बेटे ने किसानों पर जानबूझकर गाड़ियां चढ़वा दी । चार किसान मर गये । उसके साथ के चार लोगों को किसान गुण्डों ने पीट पीट कर मार डाला। वे किसान थे इसलिए उनका गुनाह गुनाह नहीं हो सकता उनको तो सरकारें मुवावजा देंगी। खैर, अजय मिश्र टेनी का बेटा जेल मे है। अजय की कुर्सी भी जा सकती है, ऐसा लोग कयास लगा रहे हैं। अब व्राह्मणों को लेकर नाराजगी दूर हो जायेगी। व्राह्मण मंत्री भी बन गया और माफिया भी साबित हो गया। इसमे राज्य और केन्द्र सरकारें निर्दोष हैं, इस व्राह्मण नेता का स्वभाव ही ऐसा है तो वे क्या करें?
अगर व्राह्मणों का असंतोष दूर करने के लिए किसी को मंत्री बनाया गया तो इसमे समूचे व्राह्मण समाज की सहमति कहाँ थी ? वे मोदीजी के नाम पर जीत के आये भाजपा के सांसद थे । उनके चरित्र और व्यवहार से लोग पहले से वाकिफ थे तो यूपी सरकार क्यों नहीं थी। आज इस बात को लेकर लोगों मे असंतोष है कि व्राह्मण के नाम पर चयनित मंत्री का ऐसा व्यवहार कैसे हो सकता है? हमें भी आश्चर्य है। क्या इनका चयन जानबूझकर व्राह्मणों की इमेज खराब करने के लिए हुई ? कुछ लोगों का संकेत इसी तरह का है। राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी इसे राजनीति चाल की नजर से देख रहे हैं।
कुछ लोग तो इस तरह कमेंट कर रहे जैसे वे इसी ताक मे बैठे हों और मोदीजी के मंत्री ने उन्हें अवसर दे दिया है।
मंत्री का व्यवहार सही नहीं कहा जा सकता है, और ऐसे मंत्री व्राह्मणों के प्रतिनिधि भी नही हो सकते हैं । तो फिर सरकारों को और लोगों को ऐसा मुगालता कैसे हो जाता है , यह बात समझ से परे है। मंत्री को सख्त हिदायत मिली है। आगे कुछ और भी हो सकता है। लेकिन इन घटनाओं से व्राह्मण का क्या ? वह तो जहाँ का तहाँ ही बना रहेगा । अच्छा हो कि भाजपा राजनीति में अच्छे व्राह्मण नेताओं का चयन करे। शुभमस्तु।