पंडित जी का कुनबा चला सायकिल की राह, बसपा ने बाहर किया

गोरखपुर। पूर्वांचल का प्रसिद्ध ब्राहम्ण परिवार गोरखपुर के हाता वाले हरिशंकर तिवारी का कुनबा का रुझान समाजवादी पार्टी की तरफ बढ़ा था। हलचल तेज थी। चर्चाएं जोरों पर थीं। इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे व चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी, उनके बड़े भाई पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी तथा उनके रिश्तेदार पूर्व विधान परिषद सभापति गणेश शंकर पांडेय को बसपा से बाहर कर दिया गया। यह कार्रवाई गोरखपुर मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी सुधीर कुमार भारती ने सोमवार की देर रात की। बसपा की इस कार्रवाई को लोग कोरम पूरा करने की बात कह रहे। हाता परिवार के सपा से नजदीकियां बढ़ने की खबरें तो एक माह से चल रहीं थीं। ऐसे में बसपा से बाहर करने की कार्रवाई महज खानापूरी है।
गोरखपुर के चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी 2017 में उस समय अपने पिता की पारम्परिक सीट पर बसपा के टिकट पर लड़ कर चुनाव जीते जब प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी। वर्ष 2017 विधान सभा चुनाव में बसपा के 19 विधायक जीत कर आए थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। सपा दूसरे नम्बर और बसपा तीसरे नम्बर पर रही। आज हालात यह हैं कि चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी के पार्टी से निकाले जाने के बाद बसपा में मात्र तीन विधायक बचे हैं। हाल ही में मुबारकपुर आजमगढ़ के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने मायावती को पत्र लिखकर पार्टी से अलविदा कह दिया था। आजमगढ़ सगड़ी की बसपा विधायक वंदना सिंह पार्टी को छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुकी है।राम अचल राजभर और लालजी वर्मा भी पार्टी से निकाले जाने के बाद समाजवादी हो चुके हैं।इसके अलावा छह अन्य विधायकों ने पार्टी छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है।
पूर्वांचल में पंडित हरिशंकर तिवारी ब्राह्मणों के नेता माने जाते हैं। उनके दोनों बेटों और रिश्तेदार गणेश शंकर पांडेय गोरखपुर-बस्ती मंडल ही नहीं पूरे पूर्वांचल में काफी लोकप्रिय हैं। हाता परिवार के सपा में जाने से भाजपा कई सीटों पर कमजोर होगी। सपा की सीटों के बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।

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